संत कबीर आज भी प्रासंगिक, सामाजिक कुरीतियों पर किया प्रहार: रेवती सैनी

 


मंडी, 30 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की जानी मानी साहित्यिक संस्था हिम साहित्य परिषद द्वारा कबीर जयंती के पावन अवसर पर नेर चौक में एक साहित्यिक गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में जिला भाषा अधिकारी मंडी रेवती सैनी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रही। जबकि साहित्यकार डॉ. गंगा राम राजी तथा जगदीश कपूर बतौर विशेष अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ. पी सी कौंडल द्वारा की गई।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि रेवती सैनी ने कहा कि कबीर आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने समाज में व्याप्त कर्मकांड, जात पात आदि कुरीतियों पर जम कर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि संत कबीर की शिक्षाओं का पालन करना होगा तभी कबीर जयंती मनाने का उदेश्य पूर्ण हो पाएगा।

दो सत्रों में विभाजित कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यकार विद्या शर्मा तथा साहित्यकार सुरेंद्र मिश्रा द्वारा संत कबीर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रपत्र पढ़े गए। दोनों प्रपत्रों पर कृष्ण चंद्र महादेविया, प्रकाश चंद्र धीमान, डॉ. पी सी कौंडल तथा डॉ गंगा राम राजी द्वारा विस्तृत चर्चा की गई। चारों वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा दोनों प्रपत्रों को सार्थक बताया। द्वितीय सत्र बहुभाषी कवि सम्मेलन का रहा, जिसमें कवि सुरेंद्र मिश्रा, जमना कुमारी, राजेंद्र सिंह ठाकुर, जगदीश कपूर, डॉ सीता राम वर्मा, सुभाष अहलवालिया, परस राम कौंडल, स्वामी राणा, किरण गुलेरिया, रत्न लाल शर्मा, विद्या शर्मा, अर्पणा धीमान, भीम सिंह परदेशी, बेली राम, पौमिला ठाकुर, हेम राज, हीरा सिंह कौशल, शिमला से लेख राज चौहान, डॉ उर्मिल कौंडल, देविंद्र गुप्ता, प्रकाश चंद्र धीमान,कृष्ण चंद्र महादेवियां, उत्तम चंद शर्मा , डॉ. पी सी कौंडल, डॉ. गंगा राम राजी ने अपनी कविताएं पढ़ी।

वहीं परिषद अध्यक्ष डॉ पी सी कौंडल ने कहा कि विद्या शर्मा तथा सुरेंद्र मिश्रा द्वारा पढ़े गए प्रपत्रों में संत कबीर की शिक्षाओं को विस्तार से व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि संत कबीर निर्गुण भक्ति धारा के महान कवि एवं संत थे, जिन्होंने ईश्वर के निर्गुण और निराकार रूप की आराधना पर बल दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा