जीवन सहारा आश्रम को जल्द ही मिलेगा अपना भवन, समाजसेवी राम सिंह गुलेरिया ने दान की भूमि

 


मंडी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। मंडी जिला के गुटकर स्थित आरोग्य जन कल्याण समिति, द्वारा जीवन सहारा नाम से वृद्धाश्रम को अब अपना भवन मिलेगा। किराए के भवन में चल रहे वृद्धाश्रम को स्थानीय समाजसेवी राम सिंह गुलेरिया ने भूमि दान की है। यहां बेसहारा, परित्यक्त तथा कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों को आश्रय एवं आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। वर्तमान में 12 वरिष्ठ नागरिक यहां रह रहे हैं।

यह आश्रम समिति द्वारा संचालित है तथा संचालिका प्रिंसी गुलेरिया और अन्य सदस्यों की देखरेख एवं समाज के दानदाताओं के सहयोग से इसका संचालन किया जा रहा है।

इसी समिति द्वारा अब इस आश्रम के लिए एक भवन का निर्माण चक्कर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर सड़क के किनारे स्थित चलाह गांव में किया जा रहा है। इस भवन में एक ही छत के नीचे वरिष्ठ नागरिकों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। जिनमें स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं, मनोरंजन, योग तथा आवागमन के लिए वाहन आदि शामिल होंगे।

वर्तमान में आश्रम का संचालन गुटकर में एक किराए के भवन में किया जा रहा है। लेकिन अब इन वरिष्ठ नागरिकों को अपना भवन जल्द ही मिलने वाला है। वरिष्ठ नागरिकों के अतिरिक्त ऐसे बुजुर्गों के लिए भी कुछ समय के लिए रहने की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। जिन्हें किसी विशेष परिस्थिति में अस्थाई रूप से आश्रय की आवश्यकता हो।

इस भवन के निर्माण के लिए समिति के सदस्य राम सिंह गुलेरिया ने अपनी भूमि उपहार के स्वरूप प्रदान की है, जिस पर भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस पुनीत कार्य को पूरा करने के लिए समाज के चिंतकों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं दानदाताओं के सहयोग की अपेक्षा है। समाज के अनेक प्रतिष्ठित लोगों ने इस सराहनीय प्रयास की प्रशंसा करते हुए अपना सहयोग भी प्रदान किया है।

समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. अशोक अवस्थी ने भी 51,000 रुपए का सहयोग प्रदान किया है। आज की बदलती सामाजिक परिस्थितियों में ऐसे प्रयासों की आवश्यकता और भी बढ़ती जा रही है। एकल परिवारों की बढ़ती संख्या तथा बच्चों के नौकरी या व्यवसाय के लिए प्रदेश से बाहर अथवा विदेश में चले जाने के कारण अनेक बुजुर्ग अपने घरों में अकेले रह जाते हैं। कई बार पति-पत्नी में से किसी एक की अचानक मृत्यु हो जाने पर, आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद, दूसरे व्यक्ति को वृद्धावस्था में अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आने वाले समय में जीवन सहारा जैसे संस्थानों की आवश्यकता और महत्त्व निश्चित रूप से बढ़ेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा