श्रेय लेने के बजाय 300 यूनिट मुफ्त बिजली की गारंटी पूरी करे सुक्खू सरकार : जयराम ठाकुर

 

शिमला, 07 नवंबर (हि.स.)। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली बिजली हिस्सेदारी के एरियर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश में राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस उपलब्धि का श्रेय लेने को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि बीबीएमबी से हिमाचल को उसका अधिकार करीब 30 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मिला है। इसमें अलग-अलग समय की प्रदेश सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयास शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री को इस उपलब्धि का श्रेय लेने के बजाय कांग्रेस की 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की चुनावी गारंटी पूरी करनी चाहिए।

शिमला स्थित अपने सरकारी आवास पर शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि बीबीएमबी में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ी गई। इस संघर्ष की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हिमाचल के पानी पर रॉयल्टी का अधिकार उठाकर की थी। वर्ष 1996 में वीरभद्र सिंह सरकार के कार्यकाल में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इसके बाद 27 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि यह किसी एक सरकार के प्रयासों का परिणाम नहीं है।

जयराम ठाकुर ने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि 4 जनवरी 2018 को उनके मंत्रिमंडल ने डिफरेंशियल एनर्जी की वापसी के मुद्दे पर आगे बातचीत करने का निर्णय लिया था। इसके बाद भी इस मामले में न्यायालय में कानूनी कार्यवाही जारी रही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और भारत के महान्यायवादी की मध्यस्थता से कैशलेस सेटलमेंट का रास्ता निकला है। अब पूंजीगत देनदारी के समायोजन के बाद हिमाचल को अगले 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को किसी एक सरकार की उपलब्धि बताना उचित नहीं है।

300 यूनिट मुफ्त बिजली की गारंटी पर सरकार को घेरा

नेता प्रतिपक्ष ने बिजली के मुद्दे पर सुक्खू सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की गारंटी दी थी। सरकार को बताना चाहिए कि यह गारंटी कब पूरी होगी। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू की गई 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना को फिर से बहाल करने की मांग भी उठाई। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में बिजली शुल्क और अलग-अलग सेस बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ रहा है। उद्योगों को भी बिजली की बढ़ी हुई दरों के कारण अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ रहा है। सरकार को इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कर्मचारियों के भुगतान और कर्ज को लेकर भी उठाए सवाल

जयराम ठाकुर ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारी महंगाई भत्ते (डीए), एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। सरकार कर्मचारियों को उनके लंबित वित्तीय लाभ देने में देरी कर रही है, जबकि दूसरी ओर लगातार कर्ज लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाओं और आम लोगों को मिल रही राहत के बीच बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, बिजली के बढ़ते शुल्क और आर्थिक बोझ से जनता परेशान है और सरकार को चुनावी वादों का जवाब देना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा