हिमाचल में अब जेल से नहीं निकलेंगे ‘खतरनाक कैदी’, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगी कोर्ट में पेशी

 

शिमला, 16 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब हत्या, आतंकवाद, संगठित अपराध, बड़े नशा तस्करी मामलों और राज्य विरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर अपराधों में बंद आरोपियों को जेल से बाहर अदालत में पेश नहीं किया जाएगा। उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जाएगी। गृह विभाग ने इस संबंध में 25 फरवरी 2026 को आदेश जारी किए हैं।

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ समय में कैदियों को जेल से अदालत ले जाने और वापस लाने के दौरान कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियां सामने आई हैं। कई मामलों में कैदियों पर रास्ते में हमले हुए, जबकि कुछ मामलों में उनके साथियों ने पुलिस टीम पर हमला कर आरोपियों को छुड़ाने की कोशिश की। अदालत परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों के इस्तेमाल की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे आम लोगों में डर का माहौल बना और कानून व्यवस्था प्रभावित हुई।

सरकार के अनुसार ऐसे मामलों में अधिकतर आरोपी संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियों, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती और राज्य विरोधी गतिविधियों जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े रहे हैं। इन्हीं सुरक्षा कारणों को देखते हुए राज्य सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 303 के तहत यह फैसला लिया है। इस प्रावधान के तहत राज्य सरकार विशेष परिस्थितियों में कुछ कैदियों को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगा सकती है।

आदेश में कहा गया है कि अब इन आरोपियों की अदालत में मौजूदगी हिमाचल प्रदेश वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम-2025 के तहत सुनिश्चित की जाएगी। यानी आरोपी जेल परिसर से ही ऑनलाइन माध्यम के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल होंगे।

सरकार ने जिन आरोपियों को इस व्यवस्था में शामिल किया है, उनमें यूएपीए और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंद आरोपी भी शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 और 113 के तहत संगठित अपराध और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल आरोपी भी जेल से बाहर नहीं लाए जाएंगे।

दो या उससे अधिक हत्या या हत्या के प्रयास के मामलों में शामिल आरोपियों, व्यावसायिक मात्रा में नशा तस्करी करने वाले और बार-बार एनडीपीएस एक्ट के मामलों में पकड़े गए आरोपियों पर भी यह आदेश लागू होगा। गैंगस्टर, सुपारी लेकर हत्या करने वाले, हिंसक लुटेरे, डकैती, रंगदारी और हथियारों से जुड़े गंभीर मामलों के आरोपी भी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किए जाएंगे।

इसके अलावा राज्य विरोधी अपराधों में शामिल आरोपियों और पॉक्सो एक्ट व महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों में बंद आरोपियों को भी जेल से बाहर नहीं लाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा