नाहन के प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में पुरी की परंपराओं का होगा विस्तार, 365 दिन मिलेगा महाप्रसाद

 


नाहन, 17 जुलाई (हि.स.)। भगवान श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध नगरी पुरी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं की झलक अब हिमाचल प्रदेश के नाहन स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में भी देखने को मिलेगी। भगवान श्री जगन्नाथ जी रथ यात्रा मंडल ने मंदिर में पूजा-पद्धति, महाप्रसाद व्यवस्था और अन्य धार्मिक परंपराओं को पुरी की परंपराओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को नाहन में भी वही आध्यात्मिक अनुभव उपलब्ध कराना है, जिसके लिए जगन्नाथ पुरी विश्वभर में प्रसिद्ध है।

नाहन का प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर एक प्रमुख विष्णु पीठ के रूप में जाना जाता है। मंदिर के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में इसके विकास के प्रयास पहले से जारी हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर में एक विशेष रसोईघर तैयार किया जा रहा है, जहां वर्ष के 365 दिन भगवान श्री जगन्नाथ का महाप्रसाद तैयार किया जाएगा। मंडल के अनुसार महाप्रसाद पूरी धार्मिक शुचिता और पारंपरिक विधि-विधान के अनुरूप बनाया जाएगा। विशेष बात यह होगी कि रसोई में केवल अधिकृत सेवक को ही प्रवेश और महाप्रसाद तैयार करने की अनुमति होगी, जबकि किसी अन्य व्यक्ति, यहां तक कि मंदिर के पुजारी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था पुरी की प्राचीन जगन्नाथ परंपरा से प्रेरित होगी।

मंडल अध्यक्ष प्रकाश चंद बंसल ने बताया कि संस्था केवल महाप्रसाद व्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी अन्य धार्मिक परंपराओं को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से 'अनसर' (अनवसर) परंपरा शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं तथा भगवान का प्रतीकात्मक उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसके बाद पुनः दर्शन प्रारंभ होते हैं और रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है।

मंडल का मानना है कि इन परंपराओं के लागू होने से स्थानीय श्रद्धालुओं को जगन्नाथ संस्कृति से निकटता से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही प्रदेश और बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी नाहन का श्री जगन्नाथ मंदिर विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। प्रकाश चंद बंसल ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं धार्मिक मर्यादाओं और शास्त्रीय नियमों के अनुरूप लागू की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि विशेष रसोई की स्थापना को लेकर जिला प्रशासन से आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं और जल्द ही लिखित आदेश जारी होने के बाद महाप्रसाद व्यवस्था नियमित रूप से प्रारंभ कर दी जाएगी। इससे नाहन का श्री जगन्नाथ मंदिर आस्था के साथ-साथ जगन्नाथ संस्कृति के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर