आईआईटी मंडी ने लॉंच किया 19 भाषाओं में नदी बेसिन के जलवायु भविष्य का आकलन करने वाला एआई उपकरण

 


मंडी, 19 मई (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी आईआईटी मंडी ने भारतीय जलवायु सूचना अन्वेषक मंच पर वॉटरशेडएआई नामक एक क्रांतिकारी अनुप्रयोग लॉन्च किया है। जलवायु जानकारी और जल संसाधन आकलन को अधिक सुलभ एवं किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईआईटी मंडी की हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला द्वारा विकसित यह मंच जल विज्ञान मॉडलिंग, गहन अधिगम और बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग कर भारत के किसी भी जलग्रहण क्षेत्र का व्यापक जलवायु आकलन मात्र 3 से 8 मिनट के भीतर तैयार करता है। यह मंच पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है और 19 भाषाओं में प्रकाशन-स्तरीय जलग्रहण क्षेत्र रिपोर्टप्रदान करता है। जिससे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए जलवायु विज्ञान एवं जल संबंधी जानकारियों की पहुंच आसान हो गई है।

आईआईटी मंडी के सिविल एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी विद्यालय के संकाय सदस्य एवं हिमालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला के प्रमुख डॉ. विवेक गुप्ता ने कहा कि हमारा लक्ष्य अत्याधुनिक जल विज्ञान अनुसंधान और जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया के बीच की दूरी को कम करना रहा है। वॉटरशेडएआई विशेषता भू-आकृतिक विश्लेषण, मिट्टी एवं भूमि उपयोग की विशेषताओं, प्रेक्षित एवं अनुमानित जलवायु आंकड़ों, सूखा सूचकांकों तथा गतिशील जल-उपज मॉडल को एक समेकित स्वरूप में प्रस्तुत करती है। प्रत्येक रिपोर्ट पुनरुत्पादनीय है, अपने आंकड़ा स्रोतों से सत्यापित है और इसे किसी मापित अथवा पूर्णतः अमापित बेसिन के लिए भी तैयार किया जा सकता है।

वॉटरशेडएआई अपनी पूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रिपोर्ट 19 भाषाओं में उपलब्ध कराता है । जिनमें हिंदी, तमिल, बंगाली, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मराठी, पंजाबी, ओड़िया, उर्दू और मलयालम जैसी भारतीय भाषाएं शामिल हैं। इसके साथ ही अंग्रेज़ी, अरबी, चीनी, जापानी, स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन और पुर्तगाली जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाएं भी सम्मिलित हैं।

हि मालयी जलवायु प्रभाव अनुसंधान प्रयोगशाला के पीएचडी शोधार्थी एवं इस विशेषता के सह-

विकासकर्ता सिद्धिक ने कहा कि हम चाहते थे कि तमिलनाडु का कोई जल वैज्ञानिक, हिमाचल प्रदेश का कोई जिला योजनाकार और मणिपुर का कोई विद्यार्थी ,सभी एक ही वैज्ञानिक प्रश्न किसी जलग्रहण क्षेत्र के बारे में पूछ सकें। अपनी मातृभाषा में उत्तर प्राप्त कर सकें, बिना वैज्ञानिक गुणवत्ता से समझौता किए।

आईआईटी मंडी के तृतीय वर्ष के बीटेक छात्र एवं मंच के वेब

विकासकर्ता पीयूष पनपालिया ने कहा कि अभियांत्रिकी पक्ष पर हमारा मुख्य ध्यान यह सुनिश्चित करना था कि जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया उपयोगकर्ता को सरल और सहज अनुभव प्रदान करे। सरकारी एजेंसियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के उपयोग हेतु तैयार किया गया वॉटरशेडएआई भारत के विभिन्न जलग्रहण क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय जलवायु एवं जल संबंधी जानकारी तक आसान पहुंच प्रदान करता है।

वॉटरशेडएआई अब भारतीय जलवायु सूचना अन्वेषक मंच पर उपलब्ध है। इसकी सहायता से उपयोगकर्ता मात्र एक क्लिक पर जलग्रहण क्षेत्र की संरचना, जल निकासी प्रतिरूप, मिट्टी की स्थिति, भूमि उपयोग, जलवायु रुझान, सूखे का इतिहास, चरम मौसम घटनाओं तथा भविष्य में जल

उपलब्धता से संबंधित विस्तृत जलवायु आकलन प्राप्त कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा