आईईटी मंडी की रिपोर्ट: भारत के 20 प्रतिशत से अधिक कॉलेज विद्यार्थियों ने शुरू किया अपना व्यवसाय,
मंडी, 21 अक्टूबर (हि.स.)। भारत के पांच में से एक से अधिक कॉलेज विद्यार्थी पहले ही अपना व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 23 प्रतिशत के लगभग बराबर है। आईआईटी मंडी द्वारा बेंगलुरु स्थित रेवा विश्वविद्यालय के सहयोग से जारी विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 में यह जानकारी सामने आई है। देश के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25,783 विद्यार्थियों पर किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत के प्रत्येक 100 में से 43 विद्यार्थी अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। यह आंकड़ा भी वैश्विक औसत के समान है। अपना व्यवसाय शुरू करने वाले विद्यार्थियों में से 35.5 प्रतिशत को पहले से ही नियमित बिक्री से आय हो रही है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 33 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, अब अधिक विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
वर्ष 2023 के सर्वेक्षण में जहां 14 प्रतिशत विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद तुरंत अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते थे, वहीं वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया। इसके विपरीत, पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में बड़ी कंपनियों में नौकरी करने की इच्छा
रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात भी 31.3 प्रतिशत से घटकर 27.4 प्रतिशत हो गया। भारत के विद्यार्थी उद्यमी तेजी से अपने विचारों को व्यवसाय में बदल रहे हैं और असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।
आईआईटी मंडी के प्रबंधन अध्ययन विद्यालय में सहायक प्राध्यापक तथा विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी वैश्विक सर्वेक्षण की भारतीय इकाई के प्रतिनिधि एवं रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. पूरन सिंह ने कहा कि भारत के विद्यार्थी दुनिया के अन्य देशों के विद्यार्थियों की तरह ही महत्वाकांक्षी हैं। जो विद्यार्थी उद्यम शुरू कर रहे हैं, वे ऐसे वास्तविक व्यवसाय खड़े कर रहे हैं, जिनमें पहले से लोगों को रोजगार मिल रहा है। पाठ्यक्रम,
विशेष उद्यमिता कार्यक्रम और परिसर में स्थापित उद्यम संवर्धन केंद्र स्पष्ट रूप से सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थियों को अधिक से अधिक सफल उद्यमियों से जुड़ने के अवसर मिलें और उन्हें शुरुआती स्तर पर ही अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। हमें यह भी मापना चाहिए कि कितने विद्यार्थी केवल नया व्यवसाय शुरू करने की इच्छा व्यक्त करने
के बजाय वास्तव में अपना उद्यम शुरू कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार विद्यार्थी उद्यमियों के बीच सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करने की योजना सबसे लोकप्रिय है। हालांकि, वर्तमान में संचालित विद्यार्थी व्यवसायों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत डिजिटल क्षेत्र से जुड़े हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिन विद्यार्थियों के रिश्तेदारों, मित्रों, सहपाठियों या शिक्षकों में कोई उद्यमी है, उनके स्वयं का उद्यम शुरू करने की संभावना अन्य विद्यार्थियों की तुलना में तीन गुना अधिक है। उहम विद्यार्थी उद्यमियों को कैसे तैयार करें शीर्षक वाली यह रिपोर्ट अक्टूबर, 2026 को मोहाली में आयोजित भारतीय प्रबंधन विद्यालय व्यवसाय सम्मेलन 2026 के दौरान जारी की गई थी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा