आईआईटी मंडी के पास जमीन हाेने के बावजूद पालमपुर सैटेलाइट कैंपस क्यों : उदयनंद शर्मा

 


मंडी, 31 अगस्त (हि.स.)। मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी और समाजसेवी अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने आईआईटी मंडी के पालमपुर में प्रस्तावित एक्सटेंशन या सैटेलाइट कैंपस खोलने के निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। उन्हाेंने आईआईटी प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल ही में पालमपुर में सैटेलाइट कैंपस के लिए लगभग 500 कनाल भूमि लीज पर लेने की प्रक्रिया का पता चलने पर, उदयनंद शर्मा ने इस पूरे कदम पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि आईआईटी मंडी के पास पहले से ही कमांद परिसर में 503 एकड़, भ्यूली में 28 एकड़ और घोड़ा फार्म के पास 8 एकड़ मिलाकर कुल करीब 539 एकड़ लगभग 1300 कनाल पर्याप्त भूमि उपलब्ध है।

उन्होंने आईआईटी प्रशासन, निदेशक और रजिस्ट्रार से सीधा सवाल किया कि संस्थान यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि उसने मंडी में मौजूद इस 539 एकड़ भूमि में से अब तक कितनी ज़मीन का उपयोग किया है । यदि यह भूमि पूरी तरह से प्रयुक्त नहीं हुई है, तो लगभग 80 किलोमीटर दूर पालमपुर में नया कैंपस खोलने की क्या तुक है।

उन्होंने विकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि संस्थान का विस्तार करना ही है तो आईआईटी के मुख्य परिसर से मात्र 20 से 22 किलोमीटर के दायरे में स्थित द्रंग क्षेत्र के घोघारधार और बासाधार में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, फिर पालमपुर जैसे दूरस्थ स्थान का चयन क्यों किया जा रहा है। इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए अधिवक्ता ने कहा कि उनके अध्ययन के अनुसार इस कानून में आईआईटी के लिए इस प्रकार के एक्सटेंशन या सैटेलाइट कैंपस का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं दिखता है। वे इस विषय पर और गहराई से कानूनी अध्ययन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आईआईटी मंडी जिले की जनता की भावनाओं, स्वाभिमान और आर्थिक विकास का प्रतीक है। यदि संस्थान की गतिविधियों को मंडी से बाहर स्थानांतरित किया जाता है तो इससे स्थानीय निवासियों के रोजगार, व्यापार और भविष्य के विकास के अवसर सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के आईटी एवं इनोवेशन सलाहकार गोकुल बुटेल की मंशा और भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने आईआईटी प्रबंधन पर पालमपुर में भूमि ढूंढने का दबाव बनाया और इसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया।

उदयन शर्मा ने स्पष्ट किया कि वे पालमपुर क्षेत्र के विरोधी नहीं हैं, लेकिन मंडी से इस प्रतिष्ठित संस्थान के संसाधनों और पहचान को छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले की पारदर्शिता जांचने के लिए आरटीआई के जरिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि दस्तावेजों का कानूनी विश्लेषण करने के बाद आवश्यकता पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने स्थानीय जनता के साथ बैठक कर विरोध रणनीति तैयार करने, व्यापक जन आंदोलन शुरू करने और इस प्रक्रिया को हर हाल में रोकने का संकल्प व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा