जिम्मेदार एआई नेतृत्व के लिए जरूरी है कि सामाजिक परिणामों पर करें विचार : प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा
मंडी, 21 सितंबर (हि.स.)। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से आयोजित एआई एवं नेतृत्व कॉन्क्लेव ‘एक्सिलरेट 4.0’ का चौथा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दो दिवसीय कॉन्क्लेव में उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ताओं, विषय विशेषज्ञों, पेशेवरों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नेतृत्व और व्यावसायिक मूल्यों के बदलते संबंधों पर व्यापक चर्चा की।
आईआईटी मंडी परिसर में आयोजित कॉन्क्लेव का विषय ‘नेक्स्ट जनरेशन एआई लीडरशिप’ रहा। कार्यक्रम के दौरान एआई अपनाने से जुड़े तीन प्रमुख बदलावों पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इनमें उत्पादकता और स्वचालन से आगे बढ़कर रणनीतिक बढ़त हासिल करना, एआई को व्यावसायिक विकास का माध्यम बनाना तथा एआई आधारित पहलों को पायलट परियोजनाओं से टिकाऊ और लाभप्रद स्तर तक ले जाना शामिल रहा।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने एआई नेतृत्व में जिम्मेदारी और सामाजिक प्रभाव को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगठनों और समाज में अधिक गहराई से समाहित हो रही है, नेतृत्व को केवल नई तकनीकों को तेजी से अपनाने के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। जिम्मेदार एआई नेतृत्व के लिए निर्णयों के व्यापक सामाजिक परिणामों पर विचार करना आवश्यक है। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीकी नवाचार मानवीय मूल्यों और सार्थक परिणामों के अनुरूप हो।
उन्होंने कहा कि आईआईटी मंडी जैसे संस्थानों की ऐसी नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका है, जो तकनीकी दक्षता को जिम्मेदारी और सामाजिक उद्देश्य के साथ जोड़ सके।
‘स्वचालन से रणनीतिक बढ़त’ विषय पर आयोजित चर्चा में इस बात पर विचार किया गया कि दक्षता और स्वचालन से प्राप्त लाभ किस तरह दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में परिवर्तित किए जा सकते हैं। साथ ही संगठनों द्वारा एआई के अधिक रणनीतिक उपयोग की दिशा में आगे बढ़ने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
हिंदुस्तान कोका-कोला के एशले डी. अकोउज़ा ने कहा कि एआई तक व्यापक पहुंच अपने आप प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त में तब्दील नहीं होती। उन्होंने कहा कि एआई से मिलने वाली वास्तविक व्यावसायिक बढ़त हासिल करने की प्रक्रिया अभी शुरुआती दौर में है और संगठन फिलहाल प्रयोग के चरण में हैं। उन्होंने नेतृत्व, रणनीतिक दृष्टि और उपलब्ध तकनीकों को संगठन की विशिष्ट व्यावसायिक जरूरतों से जोड़ने की क्षमता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी क्षमताएं उद्योग में उनके व्यापक उपयोग की तुलना में तेजी से विकसित हो रही हैं।
कॉन्क्लेव के दौरान मेंटरिंग सत्र और उद्योग-अकादमिक विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों में विद्यार्थियों को उद्योग विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने तथा एआई और प्रबंधन से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला