भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में बनी कांगड़ा चित्रकला की स्थायी दीर्घा, राज्यपाल ने किया उद्घाटन
शिमला, 15 अक्टूबर (हि.स.)। शिमला के राष्ट्रपति निवास स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) के मुख्य भवन में कांगड़ा चित्रकला को समर्पित स्थायी दीर्घा शुरू की गई है। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने गुरुवार को ‘कांगड़ा कलम : द पहाड़ी मिनिएचर आर्ट गैलरी’ का उद्घाटन किया। यह दीर्घा संस्थान के मुख्य भवन में सचिव के कार्यालय के पास कमरा नंबर आठ में स्थापित की गई है।
संस्थान के हीरक जयंती समारोह के समापन दिवस पर राज्यपाल ने संस्थान के संस्थापक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की प्रतिमा का अनावरण भी किया। उन्होंने प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी और डॉ. पंकज गुप्ता की पुस्तक फोक एंड रूरल इमेजरी इन कांगड़ा मिनिएचर्स : एन इंडिजिनस इंडियन आर्ट पर्सपेक्टिव का विमोचन किया।
दीर्घा में कांगड़ा की लघु चित्रकला के माध्यम से पहाड़ी लोकजीवन और ग्रामीण संस्कृति को दर्शाया गया है। इसमें किसानों, लोक गायकों, महिलाओं, गद्दी समुदाय और देवी-देवताओं की शोभायात्राओं से जुड़े दृश्य शामिल हैं। महिलाओं के घरेलू कामकाज और ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं को भी चित्रों में स्थान दिया गया है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि कांगड़ा चित्रकला हिमालयी क्षेत्र की सभ्यता और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं में कई समानताएं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दीर्घा पर्यटकों और कला प्रेमियों को पहाड़ी कला एवं संस्कृति को समझने का अवसर देगी।
संस्थान में जून 2026 में पांच दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की गई थी। इसमें पारंपरिक कलाकारों ने प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक औजारों की मदद से चित्र बनाए। कार्यशाला में गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से इस कला को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
हीरक जयंती समारोह के तहत संस्थान में कला प्रदर्शनी, पुस्तक मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रम में राम-स्तुति पर नृत्य, एकल गायन, कविता पाठ, राजस्थानी समूह लोकनृत्य और पहाड़ी नृत्य प्रस्तुत किए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा