एस्मा की आड़ में एचआरटीसी कर्मचारियों की आवाज दबा रही सरकार : भाजपा

 


शिमला, 23 जून (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल पर छह महीने तक रोक लगाने और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू करने के फैसले को लेकर विपक्षी दल भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।

पूर्व परिवहन मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बिक्रम ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि यह फैसला कांग्रेस सरकार की तानाशाही और कर्मचारी विरोधी सोच को दर्शाता है। उनका आरोप है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

बिक्रम ठाकुर ने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों को लंबे समय से वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और समाधान निकालने के बजाय सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कर्मचारियों को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन सरकार इस अधिकार को सीमित करने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि एचआरटीसी की मौजूदा स्थिति किसी से छिपी नहीं है। निगम में बसों की कमी है, चालक और परिचालकों सहित विभिन्न श्रेणियों के कई पद खाली पड़े हैं और आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।

भाजपा नेता के अनुसार सरकार इन समस्याओं को दूर करने के बजाय प्रतिबंध और कानूनों का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रही है।

बिक्रम ठाकुर ने कांग्रेस पर चुनावी वादों को भूलने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने कर्मचारियों के हितों की बात की थी, लेकिन आज वही कर्मचारी अपने लंबित देयकों और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के हितों को लेकर गंभीर होती तो कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत कर समाधान तलाशती।

भाजपा नेता ने कहा कि एस्मा का इस्तेमाल आमतौर पर असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है, लेकिन हिमाचल में इसका उपयोग प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से हड़ताल पर लगाए गए प्रतिबंध और एस्मा लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। साथ ही कहा कि भाजपा कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ी है और कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध जारी रखेगी।

एचआरटीसी कर्मचारियों पर एस्मा लागू करना कर्मचारियों के अधिकारों का दमन: अशोक पुरोहित

वहीं भारतीय मजदूर संघ के पूर्व अध्यक्ष, एचआरटीसी पेंशनर्स समाधान मंच के प्रदेश अध्यक्ष तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के पूर्व बोर्ड निदेशक अशोक पुरोहित ने एचआरटीसी कर्मचारियों पर अनिवार्य सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों को दबाने के लिए एस्मा का दुरुपयोग कर रही है।

पुरोहित ने कहा कि एस्मा का प्रयोग सामान्यतः उन परिस्थितियों में किया जाता है जब देश या प्रदेश किसी गंभीर संकट अथवा बाहरी खतरे का सामना कर रहा हो। लेकिन कर्मचारियों के बकाया करोड़ों रुपये के भुगतान की मांग को दबाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है बल्कि संवैधानिक भावना के भी विपरीत है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में इतनी असंवेदनशील सरकार पहले कभी देखने को नहीं मिली, जो कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी करते हुए संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ करने पर उतारू दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी कर्मचारियों से जुड़े मामलों में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसलों को लागू न करने पर सरकार को उच्चतम न्यायालय से भी फटकार का सामना करना पड़ रहा है।

अशोक पुरोहित ने सवाल उठाया कि यदि परिवहन सेवाएं अनिवार्य हैं तो क्या उन सेवाओं को संचालित करने वाले कर्मचारियों के अधिकार और उनका मेहनत से अर्जित धन अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी और उनके परिवार भी इसी प्रदेश की जनता का हिस्सा हैं और उनके वैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सरकार से कर्मचारियों के लंबित वित्तीय देयों का शीघ्र भुगतान करने की मांग करते हुए कहा कि कर्मचारियों द्वारा अर्जित करोड़ों रुपये की अदायगी करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। पुरोहित ने चेतावनी दी कि सरकार कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए दमनात्मक और अनुपयुक्त हथकंडे अपनाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा