हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग, हपुटवा ने कुलपति को सौंपा ज्ञापन

 


शिमला, 06 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन (हपुटवा) ने हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को निरस्त करने की मांग उठाई है। इस संबंध में एसोसिएशन की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कुलपति से आग्रह किया गया कि विश्वविद्यालय परिवार की मांग को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तक पहुंचाया जाए और विधेयक को निरस्त करने के लिए सरकार से आवश्यक कदम उठाने की अपील की जाए।

एसोसिएशन ने ज्ञापन में कहा कि विधानसभा में पारित राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में विश्वविद्यालय का शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी वर्ग शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक वार्ता के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं किया गया है और न ही कोई ठोस आश्वासन दिया गया है।

ज्ञापन में बीते 5 नवंबर को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित आम जनसभा का भी उल्लेख किया गया। इसमें प्रदेश के पांचों विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों, गैर-शिक्षक कर्मचारियों, पूर्व कुलपतियों, पूर्व कुलसचिवों, कार्यकारिणी परिषद के पूर्व सदस्यों, पूर्व विद्यार्थियों, विधि विशेषज्ञों, मीडिया प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया था।

जनसभा में वक्ताओं ने संशोधन विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता, शैक्षणिक स्वतंत्रता और संस्थागत गरिमा प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही, विधेयक के प्रावधानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्धारित नियमों और मानकों के संदर्भ में भी चिंताजनक बताया गया।

हपुटवा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की गरिमा, अस्मिता और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए संशोधन विधेयक के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा इसे निरस्त करने पर पुनर्विचार किया जाए। एसोसिएशन ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के बीच शीघ्र वार्ता आयोजित करने की मांग भी उठाई है, ताकि शिक्षक एवं कर्मचारी वर्ग की चिंताओं का समाधान हो सके।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नितिन व्यास ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय के हितों, शैक्षणिक परंपराओं और स्वायत्त स्वरूप को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला