विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हस्तक्षेप के खिलाफ शिक्षकों का रोष, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

 


शिमला, 08 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता में प्रस्तावित हस्तक्षेप के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज करवाया। संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए विधेयक को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और स्थापित चयन प्रक्रिया के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

संघ के अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को विधेयक के प्रावधानों से जुड़ी चिंताओं से अवगत करवाया। संघ ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध, नवाचार और स्वतंत्र चिंतन के प्रमुख केंद्र हैं। इनके प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।

प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। संघ के अनुसार विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्धारित नियमों और योग्यताओं के अनुरूप होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया में बदलाव से पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ विश्वविद्यालयों को मिलने वाली सहायता पर भी असर पड़ सकता है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों ने कुलपति कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के बड़ी संख्या में प्राध्यापकों ने भाग लिया और प्रस्तावित विधेयक वापस लेने की मांग की।

इस अवसर पर शिक्षक नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त स्वायत्तता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय शिक्षकों, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिए जाने चाहिए।

संघ महासचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने कहा कि शिक्षक समुदाय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा के लिए एकजुट है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

अध्यक्ष प्रो. नितिन व्यास ने कहा कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक स्वायत्तता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से संवाद स्थापित कर विधेयक पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला