कैरियर उन्नयन योजना लागू करने की मांग पर विश्वविद्यालय शिक्षकों का कार्य बहिष्कार
शिमला, 11 मई (हि.स.)। विश्वविद्यालयों में लंबित पड़ी कैरियर उन्नयन योजना को लागू करने की मांग को लेकर संयुक्त कार्य समिति के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के पांचों राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने शैक्षणिक कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया। इस दौरान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला सहित सभी विश्वविद्यालयों में नियमित कक्षाएं बंद रहीं और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सभी 48 विभागों के शिक्षकों ने आंदोलन का समर्थन किया। संयुक्त कार्य समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष शिक्षकों के सम्मान, अधिकारों और प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए किया जा रहा है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। योजना लागू न होने से लगभग तीन हजार विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
आंदोलन को संबोधित करते हुए डॉ. जोगिंदर सकलानी ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है और शिक्षकों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। डॉ. राजेश ने कहा कि शिक्षकों की उपेक्षा का राजनीतिक प्रभाव भी भविष्य में देखने को मिल सकता है।
डॉ. सुनील ने कहा कि योजना लागू न करना शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न है। उन्होंने प्रशासनिक देरी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
संयुक्त कार्य समिति के प्रतिनिधि डॉ. नितिन व्यास ने मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि शिक्षक टकराव नहीं बल्कि अपने अधिकारों की बहाली चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला