हिमाचल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बहाली को लेकर 60 दिन से धरने पर शिक्षक

 


शिमला, 05 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की वित्तीय स्वायत्तता बहाल करने की मांग को लेकर शिक्षक पिछले करीब 60 दिनों से धरने पर बैठे हैं। इस आंदोलन को अब प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों का भी समर्थन मिलने लगा है। वीरवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारी एकजुट हुए। आम सभा में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त करने के सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई गई। साथ ही आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। शिक्षकों का कहना है कि वित्तीय स्वायत्तता समाप्त होने से विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति और उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष नितिन व्यास ने कहा कि 20 सितंबर को विधानसभा में लाए गए कानून के तहत प्रदेश के पांच राज्य वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्वायत्तता समाप्त कर दी गई है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों को इस साल सरकार से केवल 142 करोड़ रुपये का अनुदान मिल रहा है, जबकि अकेले वेतन पर करीब 252 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को महंगाई भत्ता, वर्ष 2016 का एरियर और करियर एडवांसमेंट योजना के तहत नियमित पदोन्नति का लाभ भी नहीं मिल रहा है। कृषि विश्वविद्यालय और नौणी विश्वविद्यालय में शिक्षकों को कई-कई महीने तक वेतन नहीं मिलने की स्थिति भी सामने आ रही है।

नितिन व्यास ने कहा कि अक्टूबर 2022 में जारी सरकारी पत्र के बाद करियर एडवांसमेंट योजना के तहत शिक्षकों की पदोन्नतियां रुक गई हैं। इसके कारण पात्र होने के बावजूद कई शिक्षक एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर नहीं बन पा रहे हैं। कुछ शिक्षक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद से ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पदोन्नति में देरी से शिक्षकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका असर पीएचडी विद्यार्थियों के शोध कार्य और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।

शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष ने सरकार से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की वित्तीय स्वायत्तता बहाल करने और अन्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की मांग की। उन्होंने शिक्षकों के लंबित महंगाई भत्ते, वर्ष 2016 के एरियर और पदोन्नति के मामलों को भी जल्द निपटाने की अपील की। वीरवार की आम सभा में इन मांगों को लेकर प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाई।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा