सिंचाई उप-परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव को लेकर क्षमता विकास प्रशिक्षण आयोजित

 


मंडी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-II जाइकाओडीए के अंतर्गत जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। जिसमें सिंचाई उप-परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई के कर्मचारियों का क्षमता विकास प्रशिक्षण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डीचीएमयू मंडी के अधीन विभिन्न खंड परियोजना प्रबंधन इकाइयों से आए कृषि अधिकारियों एवं निर्माण अधिकारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेन्सी , हमीरपुर से आए विशेषज्ञ डॉ. रतन सिंह ठाकुर , डॉ. अश्वनी भारद्वाज तथा शगुन शर्मा ने प्रतिभागियों को सिंचाई उप-परियोजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के आरंभ में डीचीएमयू मंडी के एसएमएस डॉ. खूब राम ठाकुर ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेन्सी, हमीरपुर से आए विशेषज्ञों का स्वागत किया। इस अवसर पर खंड परियोजना प्रबंधक, मंडी, सरकाघाट एवं कुल्लू तथा कृषि विकास अधिकारी, मंडी एवं गोहर भी उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सिंचाई उप-परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव के महत्व, बहाव सिंचाई योजना , उठाऊ सिंचाई योजना तथा ट्यूबवेल सिंचाई योजना के संचालन एवं रखरखाव से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, इन सिंचाई योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए उत्तरदायी संस्थानों की भूमिका एवं जिम्मेदारियों तथा सिंचाई प्रणालियों के उचित संचालन और दीर्घकालिक रखरखाव की योजना तैयार करने के संबंध में भी प्रतिभागियों को अवगत करवाया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि सिंचाई उप-परियोजनाओं की कार्यक्षमता बनाए रखने, उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने तथा किसानों को निरंतर एवं प्रभावी सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए इन प्रणालियों का नियमित संचालन एवं रखरखाव अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए संबंधित कर्मचारियों एवं उत्तरदायी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन तथा समयबद्ध रखरखाव सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा