हिमाचल में 5 जिलों में लू की चेतावनी, कल से आंधी-ओलावृष्टि का ओरेंज अलर्ट

 




शिमला, 27 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में गर्मी के कड़े तेवर बने हुए हैं और आज राज्य के पांच जिलों ऊना, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सोलन में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार निचले और मैदानी इलाकों में गर्मी अपने चरम पर है, जबकि राहत की उम्मीद कल से जताई जा रही है। 28 और 29 अप्रैल को आंधी, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के साथ बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिससे मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऊना और पांवटा साहिब में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस सीजन के लिए काफी अधिक माना जा रहा है। वहीं शिमला, धर्मशाला, कांगड़ा, बिलासपुर और देहरा गोपीपुर जैसे क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया है। यही वजह है कि दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म हो गई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। सबसे अधिक न्यूनतम तापमान पांवटा साहिब और देहरा गोपीपुर में 22 डिग्री सेल्सियस रहा, इसके बाद धर्मशाला 18.5, ऊना 18.6, कांगड़ा 17.9, शिमला और नाहन 16.8, मंडी 16.6, पालमपुर 16.5, सुंदरनगर 15.5, सोलन 13.8, भुंतर 12.1, सराहन 11.9, मनाली 10.3, सेओबाग 10.7, कल्पा 8.6, तबो 6.9 और कुकुमसेरी 6.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि रात के तापमान में गिरावट नहीं हो रही है। इससे लोगों को राहत नहीं मिल पा रही।

मौसम विभाग का कहना है कि 28 व 29 अप्रैल को पूरे राज्य में बेस्टर्न डिस्टरवेन्स अधिक सक्रिय रहेगा और कई जगहों पर आंधी, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इन दो दिनों में खराब मौसम का ओरेंज अलर्ट रहेगा। 30 अप्रैल को भी कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाओं का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 1 और 2 मई को हल्की बारिश की संभावना है, हालांकि इन दिनों कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। 3 मई को फिर से कुछ स्थानों पर आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

हालांकि बदलते मौसम से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसका असर खेती-बाड़ी व बागवानी कार्यों पर पड़ सकता है। राज्य के निचले इलाकों में इन दिनों गेहूं की कटाई का काम चल रहा है और ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। कटाई का काम प्रभावित होने के साथ-साथ तैयार फसल भी खराब हो सकती है। वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के बागानों में इस समय फ्लावरिंग का दौर चल रहा है, जिस पर ओलावृष्टि का सीधा असर पड़ सकता है। इसके अलावा मटर और अन्य सब्जी फसलों को भी नुकसान की आशंका है। यही वजह है कि मौसम में बदलाव की खबर से जहां आम लोगों को राहत की उम्मीद है, वहीं किसान और बागवान चिंता में हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा