हिमाचल प्रदेश में एक हफ्ते तक भारी बारिश का अलर्ट नहीं, 121 सड़कें बंद
शिमला, 24 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से बारिश में कमी आई है। राजधानी शिमला सहित प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार सुबह मौसम साफ रहा और धूप खिली। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अगले सात दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा, लेकिन 24 से 30 अगस्त तक भारी, बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश को लेकर कोई चेतावनी या अलर्ट नहीं है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 24 अगस्त को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 25 से 28 अगस्त तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश के आसार हैं। 29 और 30 अगस्त को भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन सभी दिनों के लिए भारी, बहुत भारी और अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी नहीं है।
इस बीच बीते 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार बिलासपुर जिले के नैना देवी में 66.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। बिलासपुर के ओलिंडा में 41 मिलीमीटर, कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 36.2 मिलीमीटर, मंडी के गोहर में 34 मिलीमीटर, कांगड़ा के घमरूर में 32.3 मिलीमीटर, सिरमौर के पच्छाद में 31.2 मिलीमीटर, मंडी के मुरारी देवी में 27 मिलीमीटर और कांगड़ा में 26.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। सुंदरनगर और कांगड़ा में गरज के साथ आसमानी बिजली भी गिरी।
बारिश में कमी के बावजूद पिछले दिनों हुए भूस्खलन का असर प्रदेश में बना हुआ है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार सोमवार सुबह तक 121 सड़कें अवरुद्ध थीं। इनमें मंडी में सबसे ज्यादा 61 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 31, कांगड़ा में आठ, चंबा में सात, सिरमौर में पांच और शिमला में चार सड़कें अवरुद्ध हैं। मौसम साफ होने से सड़क बहाली के काम में तेजी आने की संभावना है।
बारिश और भूस्खलन से बिजली तथा पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। प्रदेश में 31 बिजली ट्रांसफार्मर और 19 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। कुल्लू में 18 और मंडी में नौ ट्रांसफार्मर खराब हैं। हमीरपुर जिले के नादौन में 14 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं, जबकि शिमला जिले के रामपुर और चौपाल में चार योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 30 जून से अब तक मानसून से जुड़ी घटनाओं में 230 लोगों की मौत हुई है। इनमें सड़क हादसों में 136, भूस्खलन में 17, पानी में बहने से सात और पहाड़ी या पेड़ से फिसलकर गिरने की घटनाओं में 31 लोगों की मौत शामिल है।
मानसून के दौरान प्रदेश में 94 मकान, 15 दुकानें और 346 पशुशालाएं पूरी तरह ध्वस्त हुई हैं, जबकि 386 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं से प्रदेश में अब तक 1,137 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान आंका गया है। इसमें लोक निर्माण विभाग को सबसे अधिक क्षति हुई है और विभाग का नुकसान करीब 852 करोड़ रुपये आंका गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा