हिमाचल प्रदेश में हो रही है तेज बारिश, सात जिलों में प्राकृतिक आपदा की चेतावनी, पांवटा साहिब में सभी शिक्षण संस्थान बंद
शिमला, 28 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। राजधानी शिमला समेत प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार रात से लगातार बारिश हो रही है और मौसम विज्ञान विभाग ने अगले चार दिनों को संवेदनशील माना है। मंगलवार को चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और कुल्लू में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन जिलों में अगले 24 घंटे के लिए प्राकृतिक आपदा (बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड) की चेतावनी भी जारी की गई है। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब उपमंडल में भारी बारिश की आशंका के चलते आज सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।
सिरमौर जिले में देररात से लगातार बारिश जारी है और पूरे जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने अगले दो दिनों तक भारी बारिश की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। राजधानी शिमला में रात से तेज बारिश का सिलसिला जारी है। कुल्लू में रात के दौरान अच्छी बारिश हुई और सुबह भी मौसम खराब बना हुआ है। ऊना में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि हमीरपुर में रात को तेज बारिश के बाद सुबह हल्की वर्षा दर्ज की गई।
भारत मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 28 जुलाई से 1 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। विभाग ने बताया कि 29 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और शिमला जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि कुल्लू, मंडी, सोलन और सिरमौर सहित अन्य जिलों में येलो अलर्ट रहेगा। 30 जुलाई को चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में फिर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 31 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और शिमला जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने 31 जुलाई तक अत्यधिक वर्षा की संभावना जताई है और एक तथा दो अगस्त को भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप कुमार शर्मा ने बताया कि 29 जुलाई की देर रात से 31 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियां सबसे अधिक रहने का अनुमान है। इस दौरान कई क्षेत्रों में लगातार हल्की से मध्यम बारिश होगी और कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की जा सकती है। उन्होंने बताया कि जुलाई में हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जबकि अन्य आठ जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। एक जून से 27 जुलाई तक पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से सात प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जिसे मौसम विभाग सामान्य श्रेणी में मानता है।
लगातार बारिश का असर जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में भूस्खलन और बारिश के कारण 108 सड़कें बंद हैं। इनमें मंडी में 39, कुल्लू में 33, सिरमौर में नौ और चंबा में सात सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा नौ बिजली ट्रांसफार्मर और 38 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग ने लोगों को नदी-नालों और खड्डों से दूर रहने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने और यात्रा से पहले मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी है।
प्रदेश में 30 जून को मानसून पहुंचने के बाद से भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाओं में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें लाहौल-स्पीति में चलते वाहन पर पहाड़ी दरकने से 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि चंबा में भूस्खलन और कांगड़ा में फ्लैश फ्लड की अलग-अलग घटनाओं में एक-एक व्यक्ति की जान गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा