हिमाचल में भारी बारिश का कहर, सिरमौर में बाढ़ से घिरा स्कूल, कई छात्रों सहित स्टाफ फंसा

 


शिमला, 18 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को भारी बारिश के कारण कई जगह जनजीवन प्रभावित हुआ। सिरमौर जिले के नाहन विधानसभा क्षेत्र के मातर स्थित सरकारी स्कूल में तेज बारिश और रास्ते में पानी के तेज बहाव के कारण 52 छात्र और 12 स्टाफ सदस्य कई घंटों से फंसे रहे। स्कूल के आसपास पानी भरने से यह जगह टापू जैसी स्थिति में बदल गई। प्रशासन ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम भेजी है।

जानकारी के अनुसार मातर स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते में नाले का पानी तेज बहाव के साथ चल रहा है। लगातार बारिश के कारण स्कूल तक आने-जाने का रास्ता प्रभावित हुआ और वहां मौजूद छात्र और स्टाफ सदस्य बाहर नहीं निकल सके। सिरमौर की उपायुक्त प्रियंका वर्मा ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले पर नजर रख रहा है और जल्द रेस्क्यू अभियान चलाकर स्कूल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा। रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना कर दी गई है।

सिरमौर में ही गिरी जटोन बांध का जलस्तर बढ़ने के बाद बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। इसे देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों से नदी और नालों के आसपास जाने से बचने को कहा है।

प्रदेश में मंगलवार को ओरेंज अलर्ट के बीच कई हिस्सों में बारिश हुई। राजधानी शिमला में दोपहर से रुक-रुककर बारिश होती रही। बारिश के कारण शिमला का मौसम ठंडा हो गया। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 21 अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है।

मौसम विभाग ने 19, 20 और 21 अगस्त के लिए कई क्षेत्रों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। 22 से 24 अगस्त के बीच भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है, हालांकि इन दिनों के लिए कोई चेतावनी अलर्ट जारी नहीं किया गया है। 19 अगस्त को सात जिलों हमीरपुर, चम्बा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला व सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

पिछले 24 घंटों में भी राज्य के कई इलाकों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। कुल्लू जिले के कोठी में सबसे अधिक 71 मिलीमीटर बारिश हुई। धर्मशाला और कसौली में 52-52 मिलीमीटर, काहू में 47 मिलीमीटर, नाहन में 46 मिलीमीटर और चंबा के जोत में 45 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

बारिश के कारण कई जगह भूस्खलन हुआ और सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मंगलवार दोपहर तक प्रदेश में 100 सड़कें बंद थीं। इनमें मंडी की 38, कुल्लू की 25, सिरमौर की 13, चंबा की सात तथा शिमला और कांगड़ा की छह-छह सड़कें शामिल हैं। बारिश से 13 बिजली ट्रांसफार्मर और 18 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

हमीरपुर जिले के बड़सर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पर ज्यादा असर पड़ा है। यहां नौ बिजली ट्रांसफार्मर बंद हैं। कुछ इलाकों में पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। ठियोग, रामपुर और चौपाल क्षेत्रों में छह पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि हमीरपुर के बड़सर में 12 पेयजल योजनाएं बाधित हैं।

इस मानसून में हिमाचल प्रदेश को भारी जनधन नुकसान हुआ है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार 30 जून से अब तक बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और अन्य आपदा से जुड़ी घटनाओं में 196 लोगों की मौत हुई है और 299 लोग घायल हुए हैं। इस दौरान 85 घर पूरी तरह नष्ट हुए हैं, जबकि 312 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। 14 दुकानें और 270 पशुशालाएं भी क्षतिग्रस्त या नष्ट हुई हैं।

मानसून के दौरान अब तक प्रदेश को करीब 994 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक 744 करोड़ रुपये का नुकसान लोक निर्माण विभाग को हुआ है। लगातार बारिश को देखते हुए आने वाले कुछ दिन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए संवेदनशील माने जा रहे हैं। भूस्खलन और मलबा गिरने के साथ नदियों और नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा