हिमाचल में स्क्रैप पॉलिसी लाने की तैयारी, जल जीवन मिशन के 1227 करोड़ रुपये केंद्र के पास लंबित : सरकार

 


शिमला, 24 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के विभिन्न विभागों और सरकारी कार्यालयों में वर्षों से पड़े कबाड़ (स्क्रैप) को ठिकाने लगाने के लिए जल्द नई स्क्रैप पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर अगली कैबिनेट बैठक में चर्चा की जाएगी और कबाड़ के निपटारे के लिए स्पष्ट नियम बनाकर नीतिगत फैसला लिया जाएगा, ताकि हर साल व्यवस्थित तरीके से स्क्रैप को हटाया जा सके।

विधानसभा में विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग विभागों में करोड़ों रुपये का कबाड़ लंबे समय से पड़ा है। इसे हटाने के लिए सभी विभागों के लिए एक समान नियम बनाए जाएंगे, जिससे स्क्रैप का पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से निपटान हो सके।

इस दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी कहा कि स्क्रैप का मुद्दा केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है बल्कि यह सभी विभागों से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग के स्क्रैप को ठिकाने लगाने के लिए भी अलग से नीति बनाई जाएगी और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से इस पर काम करने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नीति बनाते समय यह भी ध्यान रखा जाएगा कि स्क्रैप के निपटारे से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

वहीं, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार के पास राज्य के 1227 करोड़ रुपये लंबित हैं। उन्होंने कहा कि इस राशि को जारी करवाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है और जैसे ही केंद्र से पैसा मिलेगा, मिशन के रुके हुए कामों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष से भी आग्रह किया कि इस राशि को जल्द जारी करवाने में सहयोग करें।

उपमुख्यमंत्री ने विधायक बलबीर सिंह वर्मा के उस आरोप को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष के विधायकों के क्षेत्रों में योजनाओं पर पैसा खर्च नहीं हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल जीवन मिशन की राशि योजना-वार जारी होती है और इसे सत्ता पक्ष या विपक्ष के आधार पर खर्च नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों की योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार पूरी कोशिश करेगी और इसके लिए विधायक मुख्यमंत्री से भी मिल सकते हैं, क्योंकि वित्त विभाग भी मुख्यमंत्री के पास है।

विधानसभा में विधायक रणधीर शर्मा ने सुझाव दिया कि विपक्ष के विधायकों के क्षेत्रों की योजनाओं की डीपीआर तैयार कर उन्हें नाबार्ड भेजा जाए, ताकि उनके लिए बजट का प्रावधान हो सके।

इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन की राशि से करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से रेस्ट हाउस बनाए गए थे। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार इस पर सवाल उठा रही है और उस राशि को वापस मांग रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में जल जीवन मिशन की राशि से रेस्ट हाउस नहीं बनाए जाएंगे और जहां जरूरत होगी, वहां अन्य स्रोतों से रेस्ट हाउस बनाए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा