हिमाचल में कानून के दायरे में आएंगे स्पा सेंटर, नई पॉलिसी बनाएगी सुक्खू सरकार
शिमला, 23 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में चल रहे स्पा सेंटरों को जल्द कानून के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार इन्हें नियमित करने के लिए नई पॉलिसी और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाएगी। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सोमवार को विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान विधायक राजेश्वर गौड़ के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में स्पा सेंटर लेबर लॉ के तहत पंजीकृत होते हैं और कानून के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की जाती है। सरकार अब स्वास्थ्य विभाग और आयुष विभाग के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार करेगी, जिससे स्पा सेंटरों में चल रही गतिविधियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द दोनों विभागों की बैठक बुलाई जाएगी। मंत्री ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं गलत गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी शिकायत पुलिस को करें।
जल शक्ति विभाग के रेस्ट हाउस की ऑनलाइन बुकिंग से 5 लाख की कमाई
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि जल शक्ति विभाग के 81 रेस्ट हाउस, किसान भवन, निरीक्षण कुटीर और अन्य भवनों की ऑनलाइन बुकिंग इस साल जनवरी से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इससे अब तक विभाग को लगभग 5 लाख रुपये की आय हो चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में जल जीवन मिशन के तहत करीब 27 करोड़ रुपये की लागत से रेस्ट हाउस बनाए गए थे। राज्य सरकार इस राशि को जारी करवाने के लिए केंद्र सरकार से लगातार संपर्क में है।
नदियों और खड्डों के चैनलाइजेशन के लिए केंद्र की प्राथमिकता जरूरी
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नदियों और खड्डों के चैनलाइजेशन के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की प्राथमिकता बदलना जरूरी है। उन्होंने बताया कि छौंछ खड्ड के चैनलाइजेशन के लिए वर्ष 2019 में 26 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन इसके बाद राशि जारी नहीं हुई। अब इस परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 300 करोड़ रुपये हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में ब्यास नदी, चक्की खड्ड और अन्य खड्डों में बाढ़ से बचाव के लिए तटीकरण और सुरक्षा परियोजनाएं तैयार करने का मामला फिलहाल विचाराधीन है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा