हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारी नहीं होंगे नियमित, सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं
शिमला, 02 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी विभागों में सेवारत हज़ारों आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार ने विधानसभा में फिलहाल स्थिति साफ कर दी है। सरकार के पास आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में विधायक त्रिलोक जम्वाल के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
बिलासपुर के विधायक त्रिलोक जम्वाल ने सरकार से पूछा था कि क्या प्रदेश सरकार आउटसोर्स, पैरा-मेडिकल कर्मचारियों, पंप ऑपरेटरों और अन्य अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का विचार रखती है। उन्होंने यह भी पूछा था कि यदि सरकार ऐसा विचार रखती है तो इसके लिए क्या नीति या प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं और नियमितीकरण की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी।
मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वहीं पैरा-मेडिकल कर्मचारियों, पंप ऑपरेटरों और अन्य अनियमित कर्मचारियों के संबंध में सरकार ने कहा कि इनके लिए निर्धारित नीति के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
विधानसभा में सरकार के इस जवाब से आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर तस्वीर फिलहाल अलग दिखाई दे रही है। एक ओर लिखित जवाब में किसी प्रस्ताव के विचाराधीन नहीं होने की बात कही गई है, वहीं हाल में आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात में सरकार की ओर से नीति बनाने की बात कही गई है।
दरअसल हिमाचल के विभिन्न विभागों में करीब 27 हजार आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं। लंबे समय से ये कर्मचारी नियमितीकरण और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर राज्य आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी कुमार के नेतृत्व में कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल हाल में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से शिमला में मिला था।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सामने कर्मचारियों की लंबित मांगें और समस्याएं रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की थी। यूनियन ने सरकार से कहा कि लंबे समय से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
इससे पहले 25 अगस्त को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों ने उनके लिए नीति बनाने की मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात में भी कर्मचारियों के स्थायी समाधान की मांग उठाई गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा