मल्टी टास्क वर्करों के लिए नई नीति बनाएगी सरकार
शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को मल्टी टास्क वर्करों से जुड़ा मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में कहा कि विभिन्न विभागों में कार्यरत मल्टी टास्क वर्करों के लिए राज्य सरकार नई नीति बनाने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है और उसके बाद ही सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान विधायक सतपाल सिंह सत्ती के सवाल पर हस्तक्षेप करते हुए दी। उन्होंने कहा कि सरकार इन कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ठोस निर्णय लेने की दिशा में काम कर रही है।
इससे पहले लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मल्टी टास्क वर्करों के लिए नीति पिछली सरकार के समय बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में इन कर्मचारियों को 4 हजार रुपये मानदेय दिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 4500 रुपये किया गया और हर साल इसमें बढ़ोतरी की गई। वर्तमान में इन कर्मचारियों को 5500 रुपये मानदेय दिया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कर्मचारियों से कौन-कौन से कार्य लिए जाएंगे, इसका निर्णय सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है और जल्द ही इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा।
इसी दौरान लाहौल-स्पीति से विधायक अनुराधा राणा के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की जानकारी भी सदन में दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 12 किसानों ने अलग-अलग कंपनियों, व्यापारियों और आढ़तियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज करवाए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार इन मामलों में से एक मामला अदालत में विचाराधीन है, जबकि दो मामलों में निरस्त रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। सात मामलों की जांच अभी जारी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई करती है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है। इसके बाद विस्तृत जांच कर साक्ष्य जुटाए जाते हैं और जांच पूरी होने पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान और चार्जशीट पेश की जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत में सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के लाइसेंस या पंजीकरण को निलंबित या रद्द करने का प्रावधान भी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा