हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में गूंजेगा सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा
शिमला, 18 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से शुरू होने जा रहा है और इस दौरान राज्य के सीबीएसई स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में शिक्षकों की नियुक्ति का मामला प्रमुखता से उठ सकता है। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों ने इस विषय से जुड़े कई प्रश्न विधानसभा में लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार मानसून सत्र में सरकार से सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती, खाली पदों, प्रिंसिपलों की तैनाती और भर्ती प्रक्रिया की स्थिति को लेकर 20 से अधिक सवाल पूछे जाने की संभावना है।
राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर विकसित करने के उद्देश्य से स्कूल ऑफ एक्सीलेंस योजना शुरू की है। इसके तहत प्रदेश के 146 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर जमा दो तक की कक्षाएं संचालित की जानी हैं। शिक्षा विभाग ने 145 सरकारी स्कूलों के लिए स्कूलवार और विषयवार स्वीकृत पदों की सूची पहले ही जारी कर दी है। इन पदों के सृजन और आंतरिक युक्तिकरण को भी सरकार मंजूरी दे चुकी है। इसके बावजूद अभी तक इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर प्रत्येक स्कूल में न्यूनतम 34 और अधिकतम 84 शिक्षक पद स्वीकृत किए गए हैं। व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक 40 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का प्रावधान रखा गया है। प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों के लिए कुल 9,674 शिक्षक पद स्वीकृत हैं। इनमें पहले चरण में 5,623 शिक्षकों की भर्ती प्रस्तावित है। भर्ती के लिए लिखित परीक्षा भी पूरी हो चुकी है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नियुक्ति आदेश जारी होने का इंतजार कर रहे हैं।
विधानसभा सत्र में सरकार से यह भी पूछा जा सकता है कि भर्ती प्रक्रिया कब पूरी होगी और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां कब तक दी जाएंगी। साथ ही शेष खाली पदों को भरने की योजना और समयसीमा पर भी जवाब मांगा जा सकता है।
सीबीएसई स्कूलों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रिंसिपलों की नियुक्तियां भी की जा रही हैं। अब तक लगभग 128 स्कूलों में प्रिंसिपलों की तैनाती हो चुकी है, जबकि बाकी स्कूलों में नियुक्तियां अभी शेष हैं। ऐसे में विधानसभा में सरकार को यह बताना पड़ सकता है कि सभी स्कूलों में प्रिंसिपलों की तैनाती कब तक पूरी होगी।
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सरकार के सामने तबादलों की चुनौती भी बनी हुई है। यदि नई व्यवस्था के तहत बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की जाती हैं तो प्रदेश में करीब 10 से 12 हजार शिक्षकों के तबादले प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान में सामान्य तबादलों पर रोक लागू है। ऐसे में सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिससे नई नियुक्तियों के साथ स्कूलों में पढ़ाई पर असर न पड़े। इस संबंध में कैबिनेट सब कमेटी भर्ती प्रक्रिया, प्रशासनिक प्रभाव और कानूनी पहलुओं पर चर्चा कर चुकी है। सरकार मेरिट में चयनित अभ्यर्थियों से एक या दो स्कूलों का विकल्प लेकर उनकी वरीयता और मेरिट के आधार पर स्कूल आवंटित करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है।
इस बीच शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण 2,500 से अधिक विद्यार्थी इन स्कूलों को छोड़ चुके हैं। अभिभावकों ने शुरुआत में सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने का स्वागत किया था, लेकिन पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से कई परिवारों ने अपने बच्चों का दाखिला अन्य स्कूलों में करवा दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा