गगल एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित परिवारों का मुद्दा विधानसभा में उठा, सरकार का प्रभावितों के पुनर्वास का ऐलान

 


शिमला, 25 अगस्त (हि.स.)। गगल एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित 1,446 परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा विधानसभा में उठा, सरकार का प्रभावितों को पुनर्वास का भरोसा

शिमला, 25 अगस्त। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को गगल हवाई अड्डे के विस्तार से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन का मुद्दा उठा। भाजपा विधायक पवन कुमार काजल ने नियम-62 के तहत मामला उठाते हुए खास तौर पर उन 70 से 80 परिवारों का मुद्दा उठाया, जो पिछले पांच से छह दशकों से पंचायत की ओर से आवंटित पंचायती देह भूमि पर रह रहे हैं। इन परिवारों के पास जमीन का मालिकाना हक नहीं है। ऐसे में उन्हें मुआवजा और पुनर्वास का लाभ मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अनुपस्थिति में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पात्र लोगों को नियमों के अनुसार हरसंभव मुआवजा और पुनर्वास संबंधी लाभ दिए जाएंगे।

उप मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि गगल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए करीब 157 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इसमें 131 हेक्टेयर निजी और 26 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। इस परियोजना से कांगड़ा और शाहपुर तहसील के 14 राजस्व गांवों के करीब 1,446 परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

प्रभावित गांवों में बरस्वालकड़, भेड़ी, ढुगियारी खास, गगल खास, झिकली इच्छी, मुगरेहड़, सहौड़ा, सनौरा, रछियालु, जुगेहड़, भड़ोत, कियोड़ी और बाग शामिल हैं।

सरकार के अनुसार परियोजना के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन यानी एसआईए की अधिसूचना 28 फरवरी 2023 को जारी की गई थी। एसआईए का काम हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान शिमला ने किया। इसकी रिपोर्ट को 21 जून 2023 को राज्य मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। भूमि अधिग्रहण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना 7 जुलाई 2023 को जारी हुई। इसके बाद धारा-19 के तहत घोषणा 16 अगस्त 2024 को जारी की गई और इसे 17 अगस्त 2024 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जमीन के मुआवजे के साथ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन यानी आर एंड आर के लिए भी व्यवस्था की है। इसके तहत पात्र प्रभावित लोगों और परिवारों को उनके आवास, सामाजिक हितों और आजीविका को ध्यान में रखते हुए लाभ दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण की अनुमानित लागत 2,688.25 करोड़ रुपये है, जबकि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पर 660.78 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस तरह परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 3,349 करोड़ रुपये है। अब तक 1,960 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।

आर एंड आर के तहत अब तक 193.62 करोड़ रुपये के अवार्ड घोषित किए गए हैं। इनमें से 178.93 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। भूमि अधिग्रहण के तहत 2,579.22 करोड़ रुपये के अवार्ड घोषित हुए हैं और करीब 2,463 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि लाभार्थियों को दी जा चुकी है।

सरकार के अनुसार करीब 1,145 लाभार्थियों से जुड़ी 347.51 करोड़ रुपये की राशि अभी वितरित की जानी बाकी है। इसके पीछे एक से अधिक दावेदार होने, स्वामित्व विवाद तथा बैंक खातों और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े मामले प्रमुख कारण हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्रता तय होने के बाद संबंधित लाभार्थियों को नियमों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

सरकारी जमीन पर रहने वाले परिवारों के लिए भी सहायता

गगल हवाई अड्डे के विस्तार के लिए सरकारी जमीन पर बनी संरचनाओं और वहां रहने वाले परिवारों का मामला भी विधानसभा में उठा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 113 व्यक्तिगत संरचनाओं से जुड़े परिवारों के लिए 16.76 करोड़ रुपये की स्थानांतरण सहायता मंजूर की है।

उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने इस व्यवस्था को देश में अपनी तरह का पहला मामला बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर कारोबार करने वाले लोगों को भी सहायता राशि देने की व्यवस्था की गई है।

पंचायती देह भूमि पर रहने वाले परिवारों की चिंता

विधायक पवन कुमार काजल ने सदन में कहा कि पंचायती देह भूमि पर कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं। उन्होंने वहां मकान बनाए हैं और लंबे समय से उसी स्थान पर रह रहे हैं। जमीन का मालिकाना हक उनके नाम नहीं होने के कारण इन परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ से वंचित होने की चिंता है।

काजल ने सरकार से मांग की कि इन परिवारों को भी भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया में न्यायपूर्ण लाभ दिया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा