हिमाचल विधानसभा में पूर्व विधायक राम रत्न शर्मा के निधन पर जताया शोक
शिमला, 31 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में सोमवार को पूर्व विधायक राम रत्न शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। सदन में मुख्यमंत्री ने शोक प्रस्ताव रखा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल और मंत्री राजेश धर्माणी ने भी शोक उद्गार में हिस्सा लिया और राम रत्न शर्मा के राजनीतिक, सामाजिक तथा शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को याद किया।
स्पीकर ने सदन को राम रत्न शर्मा के निधन की सूचना दी और मुख्यमंत्री से उनके निधन पर शोक उद्गार प्रस्तुत करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राम रत्न शर्मा नादौनता विधानसभा क्षेत्र से जुड़े रहे और बाद में इस विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर बड़सर किया गया। उनका जन्म 28 जनवरी 1937 को हमीरपुर जिला के चकमोह में हुआ था। वे लंबे समय से राजनीति और सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे तथा सामाजिक जीवन में लगातार सक्रिय रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम रत्न शर्मा भगवा वस्त्र पहनते थे और सरल व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने बीएड कॉलेज की शुरुआत की और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने उनकी आत्मा की शांति की कामना की।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि राम रत्न शर्मा भाजपा और उससे पहले आरएसएस के समर्पित कार्यकर्ता रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही। अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद वे वहां से कुछ अवशेष और ईंटें अपने घर लेकर आए थे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि राम रत्न शर्मा सर्दी के मौसम में भी धोती पहनते थे और कभी-कभी शॉल लेते थे। वे योग करते थे। उनका शरीर दुबला-पतला था, लेकिन वे मजबूत थे। वे आंदोलनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे और एक बार विधानसभा के गेट के बाहर धरने पर भी बैठे थे। उन्होंने कहा कि राम रत्न शर्मा संत प्रवृत्ति और स्वच्छ छवि के व्यक्ति थे तथा उनमें समाज सेवा की ललक थी।
बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने कहा कि राम रत्न शर्मा दो बार भाजपा के विधायक रहे। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद वे उनके घर गए थे और पूरा क्षेत्र शोक में था। उन्होंने कहा कि राम रत्न शर्मा सरल स्वभाव के संत और मुनि प्रवृत्ति के व्यक्ति थे।
लखनपाल ने कहा कि राजनीतिक जीवन से संन्यास लेने के बाद राम रत्न शर्मा पतंजलि में रहे। उनसे अक्सर मुलाकात होती थी। वे ज्ञान की बातें करते थे और खासकर सनातन धर्म पर चर्चा करते थे। वे युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने का संदेश देते थे। विधायक रहते हुए वे अपने विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा करते थे और कर्मठ तथा जुझारू व्यक्ति थे।
उन्होंने कहा कि जब राम रत्न शर्मा कहीं प्रवास पर जाते थे, तो दूध पीते थे और चाय नहीं पीते थे। वे पिछले एक साल से बीमार थे। लखनपाल ने बताया कि उन्हें राम रत्न शर्मा के बीएड कॉलेज में जाने का मौका मिला था, जहां उन्होंने उन्हें अपनी एक किताब दी थी। उन्होंने बताया कि राम रत्न शर्मा के दो पुत्र और पुत्रियां हैं। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राम रत्न शर्मा को नमन किया।
मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि राम रत्न शर्मा का विधानसभा क्षेत्र उनके क्षेत्र से सटा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 में जब राम रत्न शर्मा विधायक थे, उस समय वे हमीरपुर कॉलेज में पढ़ते थे और अक्सर लोगों से उनके बारे में सुनते थे। उस समय राम मंदिर बड़ा मुद्दा था और राम रत्न शर्मा इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे।
धर्माणी ने कहा कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के समय राम रत्न शर्मा विधायक थे और लौटने पर वहां से एक ईंट लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि राम रत्न शर्मा अपने इरादों के पक्के थे और जो ठान लेते थे, उसे समर्पित भाव से पूरा करते थे। बाबा बालक नाथ मंदिर की समिति के संस्थापक सदस्यों में उनकी भूमिका रही। बीबीएमबी कॉलेज चकमोह की स्थापना में उनका अहम योगदान था। उन्होंने बीएड कॉलेज भी स्थापित किया और शिक्षा के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया।
स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने भी खुद को शोकोदगार में शामिल करते हुए कहा कि राम रत्न शर्मा वर्ष 1982 और 1990 में दो बार विधानसभा के सदस्य रहे। उन्होंने आरएसएस और भारतीय जनसंघ में लंबे समय तक काम किया तथा जनसंघ में सचिव रहे। अपने कार्यों से उन्होंने क्षेत्र में अलग पहचान बनाई थी। शिक्षा के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान रहा और ग्रामीण निर्धनता दूर करने के प्रयासों में भी उनकी भूमिका रही। स्पीकर ने सदन की ओर से राम रत्न शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया और उनकी आत्मा की शांति की कामना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा