मुख्यमंत्री के बजट जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का विधानसभा से वाकआउट, पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
शिमला, 25 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान पर सामान्य चर्चा बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाब के साथ समाप्त हो गई। हालांकि मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। इससे पहले पूरे दिन सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच बजट को लेकर तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
बजट पर सामान्य चर्चा की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने की थी और इसके समापन पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार का पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बजट में कुछ भी छिपाया नहीं है और पूरी सच्चाई सामने रखी है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल के सदस्यों से चर्चा के बाद वास्तविक स्थिति के आधार पर बजट तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के बजट में 3 से 4 हजार करोड़ रुपये तक की राशि योजनाओं में दिखा दी जाती थी, जबकि वास्तव में वह उपलब्ध ही नहीं होती थी।
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार को आरडीजी और जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो सकी और करीब 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज प्रदेश पर छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सरकार हिमाचल की वित्तीय स्थिति को श्रीलंका जैसी स्थिति में छोड़कर गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमकेयर योजना में गड़बड़ियों की विजिलेंस जांच के निर्देश दिए गए हैं और रोगी कल्याण समिति के खर्च की भी जांच करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार संसाधनों को लुटाने नहीं बल्कि वित्तीय अनुशासन के साथ काम करने आई है।
इससे पहले राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बजट चर्चा के दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उनकी कुछ टिप्पणियों पर सदन में हंगामा हुआ और बाद में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कुछ शब्दों को कार्यवाही से हटाने की बात कही। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। राजस्व मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश का आर्थिक रूप से नुकसान करने की कोशिश कर रही है और 16वें वित्त आयोग की ओर से राजस्व घाटा अनुदान बंद करना इसका उदाहरण है।
इसके बाद पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए राजस्व मंत्री की टिप्पणियों का विरोध किया और कहा कि इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने विधायक निधि में कटौती का विरोध करते हुए कहा कि इसी निधि से छोटे-छोटे विकास कार्य होते हैं। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने, भ्रष्टाचार बढ़ने और भू-माफिया तथा वन-माफिया की गतिविधियां बढ़ने के आरोप भी लगाए। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दे उठाते हुए कहा कि किसानों को महीनों से दूध का भुगतान नहीं मिला है और तीन पहिया वाहनों के परमिट से जुड़ी समस्याएं भी बनी हुई हैं।
विधायक अनिल शर्मा ने कहा की कोई बजट परफेक्ट नहीं हो सकता, विपक्ष कमियों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि कौन सा ऐसा राज्य है, जिसे आर.डी.जी मिल रही है और केवल हिमाचल को अछूता छोड़ दिया है। उन्होंने कहा प्रदेश को कैसे विकास की दृष्टि से आगे ले जाए और प्रदेश की आय के क्या क्या साधन है तथा कैसे उन्हें बढ़ाया जाए, उस पर विचार करने कि आवश्यकता है। उन्होंने कहा की इस बार बजट आकर भी कम हुआ। विधायक ने सरकार कि गारंटी का उल्लेख करते हुए कहा की सड़कों किनारे लगे उन फटो को तो निकाल दे, जिनमें हर वर्ष एक लाख यानि 5 वर्ष में 5 लाख रोजगार देने का वायदा किया गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आते ही कुछ विधानसभा तक केंद्रित हो जाना सही नहीं है।
विधायक अनुराधा राणा ने चर्चा में भाग लेते हुए प्रदेश की आरडीजी बंद करने का मामला उठाया। उन्होंने कहा सोच समझ कर ही आरडीजी का प्रावधान किया गया था। उन्होंने इसे बंद किए जाने पर कई सवाल खडे किए और प्रदेश के साथ भेदभाव करार दिया। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ देने कि बात कही लेकिन यह पैसा अभी भी नहीं मिला है। विधायक ने कहा कि एक तरह से प्रदेश का टारगेट किया जा रहा। उन्होंने कहा कि बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। विधायक ने कहा कि पहले उनके विधानसभा क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड के लिए लोगों को दूसरे जिलों के लिए जाना पड़ता था लेकिन अब ये सुविधा अब वही मिल रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा