हिमाचल पर कर्ज का बोझ बढ़कर 1.03 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा, एक साल में 10,966 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी: कैग रिपोर्ट
शिमला, 30 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार पर कर्ज का बोझ वर्ष 2024–25 के दौरान और बढ़ गया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वित्तीय रिपोर्ट (2024–25) के अनुसार राज्य की कुल देनदारियां एक साल में 10,966.89 करोड़ रुपये बढ़कर 1,03,331.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। इससे पहले 1 अप्रैल 2024 को राज्य पर कुल देनदारी 92,365 करोड़ रुपये थी। यह रिपोर्ट सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में पेश की।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024–25 के दौरान राज्य सरकार ने कुल 26,622.16 करोड़ रुपये के नए ऋण लिए, जबकि इसी अवधि में 18,168.80 करोड़ रुपये के पुराने कर्ज का भुगतान भी किया गया। इसके बावजूद कुल देनदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो यह दिखाती है कि राज्य की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को लगातार नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं।
कैग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सार्वजनिक ऋण (पब्लिक डेब्ट) से जुड़ी देनदारियों में भी वृद्धि हुई है। यह देनदारी 8,328.94 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,842.47 करोड़ रुपये हो गई, यानी इसमें 2,513.53 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह शुद्ध सार्वजनिक ऋण देनदारी 1 अप्रैल 2024 को 25,363.84 करोड़ रुपये थी, जो 31 मार्च 2025 तक बढ़कर 27,777.37 करोड़ रुपये पहुंच गई।
रिपोर्ट में बाजार से लिए गए दीर्घकालिक कर्ज का भी जिक्र किया गया है। वर्ष 2024–25 के दौरान सरकार ने अलग-अलग किश्तों में कुल 10 दीर्घकालिक ऋण लिए। इनमें 550 करोड़ रुपये, 200 करोड़ रुपये, 200 करोड़ रुपये, 150 करोड़ रुपये, 150 करोड़ रुपये, 400 करोड़ रुपये, 200 करोड़ रुपये, 100 करोड़ रुपये, 300 करोड़ रुपये और 95 करोड़ रुपये के ऋण शामिल हैं। इन ऋणों पर ब्याज दरें 8.08 प्रतिशत से लेकर 9.63 प्रतिशत के बीच रहीं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक इन ऋणों को बाजार से जुटाया गया और बाद में इनके भुगतान के लिए अधिसूचना जारी की गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा