आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना छूट मेरिट में आगे तो अनारक्षित पद पर होगा चयन, हिमाचल सरकार ने ‘अपना मेरिट’ के नियम किए स्पष्ट
शिमला, 24 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में आरक्षण के दौरान ‘अपना मेरिट’ से चयनित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। कार्मिक विभाग ने निर्देश जारी कर कहा है कि अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के ऐसे अभ्यर्थी, जो सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों पर लागू समान मानकों के आधार पर चयनित होते हैं, उन्हें आरक्षित पदों में नहीं गिना जाएगा। ऐसे अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों में समायोजित किया जाएगा।
कार्मिक विभाग की प्रधान सचिव एम. सुधा देवी की ओर से जारी निर्देश सभी प्रशासनिक सचिवों, मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और प्रदेश के सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, बोर्डों तथा विश्वविद्यालयों के अध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों, सचिवों और कुलसचिवों को भेजे गए हैं। विभाग ने वर्ष 2011 में जारी ‘अपना मेरिट’ से संबंधित निर्देशों को दोहराते हुए कुछ प्रावधानों को संशोधित और समेकित किया है।
समान मानक पर चयन होने पर आरक्षित सीट में नहीं गिना जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का कोई अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए लागू समान मानकों पर चयनित होता है, तो उसकी नियुक्ति आरक्षित रिक्ति के विरुद्ध नहीं मानी जाएगी। उसे उसकी मेरिट के आधार पर सामान्य अथवा अनारक्षित रिक्ति में स्थान दिया जाएगा।
वहीं, यदि किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी के चयन में कोई रियायत दी गई है, तो उसे ‘अपना मेरिट’ वाला अभ्यर्थी नहीं माना जाएगा। विभाग ने उदाहरण देते हुए कहा है कि आयु सीमा में छूट, अनुभव में छूट, शैक्षणिक योग्यता में छूट, लिखित परीक्षा में निर्धारित अवसरों से अधिक अवसर देना या सामान्य वर्ग की तुलना में चयन के लिए अधिक बड़ा क्षेत्र उपलब्ध कराना जैसी रियायतें इसमें शामिल हैं। ऐसे अभ्यर्थियों को आरक्षित रिक्तियों के विरुद्ध ही माना जाएगा और उन्हें अनारक्षित रिक्तियों के लिए उपलब्ध नहीं माना जाएगा।
पूर्व सैनिक, दिव्यांग और अन्य क्षैतिज आरक्षण में भी स्थिति साफ
सरकार ने क्षैतिज आरक्षण वाले वर्गों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की है। इनमें पूर्व सैनिक, पूर्व सैनिकों के आश्रित, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित, दिव्यांगजन, विशिष्ट खिलाड़ी तथा अंत्योदय/बीपीएल श्रेणी शामिल हैं।
निर्देशों के अनुसार इन वर्गों का कोई अभ्यर्थी सामान्य या अनारक्षित अभ्यर्थियों के समान मानकों पर पर्याप्त मेरिट और अंक हासिल करता है और उसने किसी तरह की छूट का लाभ नहीं लिया है, तो उसे उसकी मेरिट के आधार पर खुले अथवा अनारक्षित क्षैतिज पदों में समायोजित किया जाएगा। ऐसे अभ्यर्थी को संबंधित आरक्षित क्षैतिज कोटे के विरुद्ध नहीं गिना जाएगा।
पहले मेरिट सूची, फिर क्षैतिज आरक्षण (हॉरिजोंटल रिज़र्वेशन) की गणना
राज्य सरकार ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के राजेश कुमार दरिया बनाम राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया है। निर्देशों में कहा गया है कि जहां किसी वर्ग के लिए ऊर्ध्वाधर आरक्षण के भीतर क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, वहां पहले संबंधित ऊर्ध्वाधर आरक्षण की मेरिट के आधार पर चयन सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद देखा जाएगा कि उस सूची में क्षैतिज आरक्षण वाले वर्ग के कितने अभ्यर्थी पहले से शामिल हैं।
यदि सूची में क्षैतिज आरक्षण के पात्र अभ्यर्थियों की संख्या निर्धारित कोटे के बराबर या उससे अधिक है, तो क्षैतिज आरक्षण को पूरा करने के लिए अलग से कोई चयन करने की जरूरत नहीं होगी। यदि निर्धारित संख्या से कम अभ्यर्थी मिलते हैं, तो जितने अभ्यर्थियों की कमी होगी, उतने अभ्यर्थियों को संबंधित ऊर्ध्वाधर आरक्षण की मेरिट सूची के निचले क्रम से हटाकर क्षैतिज आरक्षण वाले अभ्यर्थियों को शामिल किया जाएगा।
दिव्यांग अभ्यर्थी को साक्षर या परीक्षा सुविधा देना छूट नहीं
दिव्यांगजन के संबंध में भी सरकार ने विशेष स्पष्टीकरण जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुनंदा भंडारे फाउंडेशन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय के अनुपालन में केंद्र सरकार के 27 सितंबर 2022 के कार्यालय ज्ञापन में किए गए प्रावधान को हिमाचल प्रदेश में अपनाया गया है।
इसके अनुसार कोई बेंचमार्क दिव्यांगता वाला अभ्यर्थी बिना किसी रियायत के अपनी मेरिट के आधार पर चयनित होता है, तो उसे दिव्यांगजन के लिए आरक्षित रिक्ति के बजाय अनारक्षित रिक्ति के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिव्यांग अभ्यर्थी को लिखने के लिए सहायक (स्क्राइब) की सुविधा और परीक्षा में अतिरिक्त समय दिया जाना ‘रियायती मानक’ नहीं माना जाएगा। इसी तरह किसी व्यक्ति की स्वयं की दिव्यांगता को मेडिकल फिटनेस जांच में ‘अपना मेरिट’ निर्धारित करने के लिए रियायत नहीं माना जाएगा।
2011 के निर्देश दोहराए, 2014 के निर्देश संबंधित हिस्से तक खत्म
कार्मिक विभाग ने कहा है कि 12 दिसंबर 2011 को जारी ‘अपना मेरिट’ से संबंधित निर्देशों को दोहराया गया है। वहीं 12 नवंबर 2014 को जारी निर्देशों को ऊपर बताए गए प्रावधानों की सीमा तक अधिरोहित (सुपरसीड) किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा