हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के पद घटाएगी सरकार
शिमला, 17 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश को बड़े अधिकारियों की संख्या बढ़ाने की नहीं, योजनाओं को जमीन पर लागू करने वाली प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है। राज्य सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या में कमी करने जा रही है। उनका कहना है कि इससे प्रदेश को हर वर्ष करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी और इस धनराशि को विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सोमवार को शिमला से मंडी जिले के लिए 25 नई इलेक्ट्रिक बसों को वर्चुअल हरी झंडी दिखाने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 153 से घटाकर 130 की जाएगी। इसी तरह आईएफएस अधिकारियों के 118 पदों को घटाकर 83 किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईपीएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या में भी कमी करने का फैसला लिया गया है।
सुक्खू ने कहा कि प्रदेश का प्रशासनिक कामकाज 100 से 110 आईएएस अधिकारियों के साथ भी सुचारू रूप से चल सकता है। हालांकि अधिकारियों की राय को ध्यान में रखते हुए संख्या 130 रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं, उनकी फाइलों को सरकार तेजी से मंजूरी दे रही है। उनके अनुसार अधिकारियों को भी प्रदेश की वित्तीय स्थिति की जानकारी है और कई अधिकारी स्वयं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आगे आ रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के 18 अगस्त के मंडी दौरे को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान प्रियंका गांधी मंडी आई थीं और उस समय उन्होंने एक स्कूल के निर्माण में सहयोग का वादा किया था। अब वह उसी वादे को पूरा करने के लिए मंडी आ रही हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रियंका गांधी स्कूल के बच्चों से मुलाकात करेंगी और उनसे संवाद करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरे के दौरान कोई राजनीतिक जनसभा प्रस्तावित नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सितंबर में सोलन में होने वाले एक राजनीतिक कार्यक्रम में प्रियंका गांधी के शामिल होने की संभावना है।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं कर रही है और चरणबद्ध तरीके से उन्हें वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल से कर्मचारियों से जुड़ी लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां वर्तमान सरकार को विरासत में मिली हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जयराम ठाकुर प्रदेश के अधिकारों के मुद्दों पर आवाज नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने आरडीजी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बंद होने से प्रदेश को 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, फिर भी राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान कभी नहीं रोका। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में अधिकारियों के लिए उपलब्ध सरकारी वाहनों की संख्या भी कम की जाएगी। उनका कहना था कि सरकारी खर्चों में कटौती कर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एचआरटीसी के बेड़े में एक हज़ार नई बसें खरीदने की फाइल को मंजूरी दे दी गई है। इससे पहले 3 सौ इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा चुकी हैं। इसके अलावा 200 हाइड्रोजन बसें भी जल्द बेड़े में जोड़ी जाएंगी। उन्होंने कहा कि ये बसें एक बार चार्ज होने पर लगभग 300 से 380 किलोमीटर तक चल सकेंगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार नई बसों के लिए 12 वर्षों के रखरखाव का प्रावधान किया गया है और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर भुगतान भी किया जा चुका है। यदि किसी बस में खराबी आती है तो संबंधित कंपनी पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने दावा किया कि बेहतर माइलेज, आधुनिक तकनीक और घाटे वाले रूटों पर संचालन में सुधार के कारण एचआरटीसी आने वाले पांच वर्षों में लाभ की स्थिति में पहुंच सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा