हिमाचल में पहली बार शुरू हुई सरकारी पैट स्कैन की सुविधा, आईजीएमसी शिमला में उद्घाटन

 


शिमला, 02 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में पहली बार सरकारी क्षेत्र में पैट (पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी) स्कैन की सुविधा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसके साथ ही अब प्रदेश के मरीजों को पैट स्कैन जैसी आधुनिक जांच के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

पैट स्कैन एक आधुनिक जांच तकनीक है, जो शरीर में होने वाले रोगों का शुरुआती स्तर पर मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में मदद करती है। सामान्य तौर पर सीटी स्कैन और एमआरआई जैसे पारंपरिक परीक्षण शरीर में संरचनात्मक बदलाव बाद के चरणों में दिखाते हैं, जबकि पैट स्कैन तकनीक रोग से जुड़े बदलावों का पहले ही पता लगा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा खास तौर पर कैंसर के स्टेज निर्धारण, उपचार के प्रभाव का आकलन करने, बीमारी की दोबारा वापसी का पता लगाने और भविष्य के जोखिम का अनुमान लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कैंसर, फेफड़ों के कैंसर, प्लूरल मैलिगनेंसी, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेस्ट्रिक कैंसर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर तथा यूरोलॉजिकल और टेस्टिकुलर कैंसर के निदान और उपचार प्रबंधन में उपयोगी मानी जाती है। इसके अलावा अब इसका उपयोग हृदय रोग, न्यूरोलॉजी से जुड़े मामलों तथा संक्रमण और सूजन संबंधी बीमारियों के आकलन में भी किया जा रहा है, खासकर उन स्थितियों में जहां पारंपरिक जांच से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे प्रदेश के लोगों को बेहतर और विश्वसनीय उपचार अपने ही राज्य में मिल सके। उन्होंने बताया कि हाल ही में आईजीएमसी शिमला में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन भी शुरू की गई है। इसके अलावा सरकार आने वाले समय में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी सुविधाओं के विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे लोगों को घर के पास ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की। इस नई मशीन के लगने से न्यूक्लियर मेडिसिन से जुड़ी जांच सुविधाएं और मजबूत होंगी और मरीजों को और अधिक उन्नत जांच सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा