नए जिले बनाने से पहले सड़कों के गड्ढे भरें सुक्खू सरकार : सुधीर शर्मा

 


शिमला, 15 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन के लिए की चर्चा और प्रशानिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग बनाने के बीच भाजपा नेता और धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए जिलों के गठन की कवायद को चुनावी शगूफा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता का ध्यान प्रदेश के दूसरे मुद्दों से हटाने की कोशिश कर रही है। वह वीरवार को शिमला विश्वविद्यालय में हमीरपुर छात्र एसोसिएशन के कार्यक्रम हमीर संगम में पहुंचे थे।

सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में नए जिले बनाने से पहले इसके खर्च और जनता को होने वाले लाभ का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नए जिलों के गठन पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश सरकार कर्ज लेकर काम चला रही है, तो इस अतिरिक्त खर्च के लिए धन कहां से आएगा?

उन्होंने कहा कि जब सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो सरकार को नए जिलों के गठन के बजाय सड़कों की मरम्मत, विकास कार्यों और आम जनता को समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाने पर ध्यान देना चाहिए।

सुधीर शर्मा ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और स्मार्ट वर्किंग से प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और फाइलों का निपटारा समय पर हो, सरकार को इस दिशा में काम करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि नए जिलों की चर्चा से लोग करीब छह महीने तक इसी बहस में उलझे रह सकते हैं कि कौन-सा जिला बनेगा और उनका क्षेत्र किस जिले में शामिल होगा। इससे प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां और जनता की रोजमर्रा की समस्याएं दूर नहीं होंगी।

सुधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार की दस चुनावी गारंटियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रशासनिक और आईएएस अधिकारियों की संख्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नई इकाइयां बनाने से सरकारी कामकाज और जटिल हो सकता है। कई बार फाइलें एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास जाती रहती हैं, जिससे काम में देरी होती है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल में जिलों के गठन के दौरान स्थानीय संस्कृति, भाषा और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया था। नए जिलों के गठन से पहले उनकी जरूरत, जनता को मिलने वाले लाभ और खर्च की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा