नए जिलों का फैसला राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, जनता की सुविधा के लिए होगा : नरेश चौहान

 

शिमला, 16 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश सरकार की ओर से इस विषय पर आयोग गठित किए जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भाजपा की प्रतिक्रियाओं पर पलटवार करते हुए शुक्रवार को कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है। नए जिले बनाने का निर्णय आयोग की रिपोर्ट आने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।

नरेश चौहान ने कहा कि नए जिलों के गठन की मांग हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से उठती रही है। अलग-अलग क्षेत्रों के लोग प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर यह मांग करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस विषय पर आयोग का गठन किया है। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों और सुझावों के आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी।

उन्होंने कहा कि नए जिलों के गठन का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना, लोगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाना और विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है। यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं उठाया गया है। सरकार चाहती है कि सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही इस बारे में उचित निर्णय लिया जाए।

नए जिलों के गठन को लेकर भाजपा नेताओं के विरोध पर सवाल उठाते हुए नरेश चौहान ने कहा कि जब सरकार ने अभी केवल आयोग का गठन किया है और उसे रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है, तो भाजपा के नेताओं को इतनी जल्दी प्रतिक्रिया देने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? उन्होंने कहा कि अभी आयोग की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि किन क्षेत्रों में नए जिले बनाने की आवश्यकता है और इस प्रस्ताव को लागू करना कितना व्यावहारिक होगा। ऐसे में रिपोर्ट आने से पहले ही विरोध करना उचित नहीं है।

नरेश चौहान ने भाजपा से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा नए जिलों के गठन के पक्ष में नहीं है, तो उसे अपनी स्थिति खुलकर जनता के सामने रखनी चाहिए। उनके अनुसार प्रदेश में प्रशासनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे विषय पर राजनीतिक विरोध करने के बजाय व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नए जिलों के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है। नरेश चौहान ने कहा कि सरकार इस विषय पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेगी। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि नए जिलों के गठन की जरूरत कहां है और इस संबंध में क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा