हिमाचल में खनन के लिए अलग निदेशालय गठित, अवैध खनन पर लगेगी रोक : हर्षवर्धन चौहान
शिमला, 16 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, सरकारी राजस्व बढ़ाने और अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए उद्योग विभाग से अलग खनन निदेशालय का गठन किया गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में खनन गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए सरकार इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार का उद्देश्य खनन से होने वाली आय बढ़ाने के साथ नियमों का पालन सुनिश्चित करना और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
उद्योग मंत्री के अनुसार हिमाचल प्रदेश में करीब 450 क्रशर और खनन इकाइयां हैं। इनमें से लगभग 25 इकाइयां बंद रहती हैं, जबकि करीब 300 से 350 क्रशर और खनन इकाइयां चालू हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में हिमाचल में खनन गतिविधियां सीमित हैं। सरकार खनन क्षेत्र को व्यवस्थित करने और इसके संचालन को निर्धारित नियमों के दायरे में रखने की दिशा में काम कर रही है।
हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि वन क्षेत्रों में खनन से जुड़े मामलों को वन विभाग देखता है। ऐसे मामलों में वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के प्रावधान भी लागू होते हैं, जो खनन गतिविधियों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। निजी भूमि पर खनन के लिए भी निर्धारित नियम हैं और उन्हीं के अनुसार अनुमति दी जाती है। सरकार का प्रयास है कि खनन से संबंधित नियमों का पालन हो और अवैध गतिविधियों पर रोक लगे।
नई उद्योग नीति से निवेश बढ़ाने की तैयारी
उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल्द ही नई उद्योग नीति लागू करने जा रही है। इसके माध्यम से हिमाचल में नए उद्योगों और निवेश को आकर्षित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार करना जरूरी है। इसके साथ ही पहले से चल रहे उद्योगों को प्रदेश में बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि कुछ दूसरे राज्य उद्योगपतियों को अधिक सुविधाएं और राहत दे रहे हैं। इस वजह से उद्योगों के दूसरे राज्यों में जाने की स्थिति भी बनती है। उद्योगों के बंद होने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। ऐसे मामलों को राजनीतिक नजरिये से देखने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों को समझना जरूरी है। सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास कर रही है।
नए जिलों पर कमेटी की रिपोर्ट के बाद निर्णय
हिमाचल प्रदेश में नए जिले बनाने की मांग और इस मुद्दे पर जारी चर्चा के संबंध में हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार ने इस विषय पर एक कमेटी गठित की है। कमेटी की रिपोर्ट आने और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए जिले बनाने की कवायद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी शुरू हुई थी। ऐसे में भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
कांग्रेस सरकार के कार्यक्रमों और योजनाओं को लेकर भाजपा की आलोचना पर उद्योग मंत्री ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार के कार्यों की आलोचना करना है। भाजपा कांग्रेस सरकार के कार्यक्रमों की तारीफ नहीं करेगी, लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जनहित के कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान प्रदेश के विकास, उद्योगों को बढ़ावा देने और जनता के हित में निर्णय लेने पर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा