हिमाचल में एलडीओ महंगा होने से बढ़ी सड़क निर्माण लागत, केंद्र से मांगेगा मदद
शिमला, 04 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम एशिया में इजरायल-ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों पर भी दिखाई देने लगे हैं। राज्य में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) और तारकोल की लागत बढ़ने से कई जगह काम धीमा पड़ गया है और कुछ ठेकेदारों ने काम रोकने की चेतावनी दी है।
दरअसल, प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) फेज-3 के तहत कई सड़कों की मेटलिंग और टायरिंग का काम चल रहा है। इन कामों में एलडीओ का इस्तेमाल होता है। ठेकेदारों का कहना है कि जब टेंडर आवंटित किए गए थे, उस समय एलडीओ की कीमतें कम थीं, लेकिन अब अचानक लागत बढ़ने से काम करना मुश्किल हो गया है। इसी कारण कुछ जगहों पर काम प्रभावित हुआ है।
वहीं, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका असर पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और एलडीओ की उपलब्धता व कीमतों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क टायरिंग के काम में इस्तेमाल होने वाले एलडीओ की आपूर्ति कम हो रही है, जिससे लागत बढ़ गई है।
मंत्री ने बताया कि नाबार्ड के तहत बनने वाली सड़कों की लागत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पहले तीन मीटर चौड़ी सड़क के एक किलोमीटर निर्माण पर करीब 13.75 लाख रुपये खर्च आते थे, जो अब बढ़कर लगभग 17 लाख रुपये हो गए हैं। इसी तरह छह मीटर चौड़ी सड़क की लागत 27.50 लाख रुपये से बढ़कर करीब 35.8 लाख रुपये और दस मीटर चौड़ी सड़क की लागत 41.25 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 53.25 लाख रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच गई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत को देखते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाए। नाबार्ड और अन्य योजनाओं के तहत सड़कों की बढ़ी हुई लागत के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह भी किया जाएगा, जिससे चल रहे निर्माण कार्य समय पर पूरे हो सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा