हिमाचल उच्च न्यायालय के निर्देश, कर्मचारियों की तबादला नीति हो पारदर्शी, गृह जिले में लगातार तैनाती पर लगे रोक
शिमला, 19 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य कैडर के कर्मचारियों की तबादला नीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए सरकार को इसमें बड़े बदलाव करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसके तहत किसी भी कर्मचारी को प्रारंभिक नियुक्ति के बाद कम से कम 2 से 3 लगातार तैनातियों तक अपने गृह जिले में पोस्टिंग न दी जाए। साथ ही यदि कोई कर्मचारी पहले से अपने गृह जिले में तैनात रहा है, तो उसे उसी जिले के भीतर दूसरी जगह भेजने के बजाय दूसरे जिले में स्थानांतरित किया जाए।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कर्मचारियों की तैनाती के दो स्थानों के बीच न्यूनतम दूरी 100 से 150 किलोमीटर होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के पक्षपात या भेदभाव की गुंजाइश समाप्त हो सके। अदालत ने राज्य सरकार को यह भी सुझाव दिया कि सभी कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जाए। इस व्यवस्था के तहत यह स्पष्ट होना चाहिए कि कोई कर्मचारी किस स्थान पर कितने समय तक कार्य कर चुका है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऑनलाइन सिस्टम में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि जब कोई कर्मचारी किसी स्थान पर निर्धारित अवधि पूरी कर ले, तो उसका नाम विशेष संकेत या लाल बिंदु के साथ दिखाई दे। अदालत ने सुझाव दिया कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए यह अवधि 3 वर्ष तथा अन्य कर्मचारियों के लिए 2 वर्ष तय की जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर खाली पदों की जानकारी भी ऑनलाइन दिखाई जानी चाहिए, ताकि तबादले पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हो सकें।
अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि तबादला प्रक्रिया को लेकर आम धारणा बन गई है कि यह एक तरह का “उद्योग” बन चुकी है, जिसे खत्म करना जरूरी है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इन सभी टिप्पणियों पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की है। साथ ही आदेश की प्रति शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, आईपीएच और लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिवों को भी भेजने को कहा गया है, क्योंकि तबादलों के अधिकतर मामले इन्हीं विभागों से जुड़े होते हैं।
इस मामले में कोर्ट ने संबंधित याचिका को खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह चिंताजनक है कि कई कर्मचारी अपनी नियुक्ति वाली जगह पर ही लंबे समय तक बने रहना चाहते हैं और दूसरी जगह जाने से बचते हैं, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य कैडर का कोई भी कर्मचारी यह दावा नहीं कर सकता कि उसे अपने घर के पास ही नौकरी करने का अधिकार है।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता अगस्त 2019 से मंडी में ग्रामीण विकास विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। बीच में उसका तबादला भुंतर किया गया था, लेकिन उसने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और व्यावहारिक रूप से मंडी में ही काम करता रहा। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा