138 साल पुरानी राष्ट्रपति निवास की इमारत पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

 




शिमला, 16 जुलाई (हि.स.)। शिमला की सबसे ऐतिहासिक और पहचान मानी जाने वाली इमारतों में शामिल राष्ट्रपति निवास (वाइसरीगल लॉज) यानी भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की बिगड़ती हालत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की चिंता का विषय बन गई है। 138 साल पुरानी इस धरोहर की जर्जर स्थिति पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस इमारत को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा और शोध के लिए समर्पित किया था, उसके संरक्षण में गंभीर लापरवाही बरती गई है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यह स्थिति केंद्रीय शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी निभाने में विफलता को दिखाती है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण, शिमला के सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट पर विस्तार से विचार किया। निरीक्षण में सामने आया कि भवन का मुख्य सार्वजनिक प्रवेश द्वार ठीक स्थिति में नहीं है। इमारत की कई दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। छत, सीढ़ियां, रेलिंग और फर्श भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं। अदालत के समक्ष दायर हलफनामे में बताया गया कि वर्ष 1888 में बने इस ऐतिहासिक भवन की स्थापना के बाद से आज तक कभी व्यापक स्तर पर मरम्मत नहीं कराई गई। अदालत ने इसे बेहद चिंताजनक स्थिति बताया।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2019 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भवन के संरक्षण और मरम्मत के लिए 66.38 करोड़ रुपये के संशोधित बजट को मंजूरी दी थी। इसके तहत सबसे पहले किचन विंग के जीर्णोद्धार का काम अगस्त 2020 में शुरू हुआ। इस कार्य पर अब तक 6.49 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अगस्त 2025 तक केवल 68 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया। अदालत ने इस धीमी प्रगति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इतनी महत्वपूर्ण विरासत के संरक्षण में देरी गंभीर मामला है।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी), भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अलग-अलग विस्तृत हलफनामे दाखिल करें। अदालत ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि भवन से हटाए गए प्राचीन हथियारों, ऐतिहासिक वस्तुओं और कलाकृतियों की कोई सूची तैयार की गई थी या नहीं। साथ ही यह भी बताया जाए कि ये वस्तुएं इस समय कहां सुरक्षित रखी गई हैं। सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी बताया गया कि शिमला के ऐतिहासिक मॉल रोड के लिए एक समान हेरिटेज डिजाइन और कार्यान्वयन ढांचा तैयार करने के लिए परामर्श सेवाओं का टेंडर जारी किया जा चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा