एचआरटीसी कर्मचारी को हाईकोर्ट से राहत, पदावनति और वसूली का आदेश रद्द
शिमला, 05 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी अनुशासनिक मामलों में फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी दंडात्मक आदेश में उसके कारण साफ-साफ लिखे जाना जरूरी हैं। अदालत ने कहा कि तर्क और कारण किसी भी आदेश की आत्मा होते हैं। यदि कोई अर्ध-न्यायिक प्राधिकारी बिना कारण बताए किसी कर्मचारी के खिलाफ सजा का आदेश जारी करता है, तो ऐसा आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।
इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के एक कर्मचारी को पदावनत करने और उससे 2.57 लाख रुपये से अधिक की वसूली करने का आदेश रद्द कर दिया।
मामला एचआरटीसी में वरिष्ठ स्टोर कीपर के पद पर तैनात खेम सिंह से जुड़ा है। उनके खिलाफ वर्ष 2019 में विभागीय जांच शुरू की गई थी। आरोप था कि कुल्लू यूनिट में तैनाती के दौरान उन्होंने डीजल की हेराफेरी की और फर्जी बिल बनाए। उनके खिलाफ कुल आठ आरोप लगाए गए थे।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मंडी के डिवीजनल मैनेजर, जो इस मामले में अनुशासनात्मक प्राधिकारी थे, ने 5 मई 2021 को खेम सिंह को वरिष्ठ स्टोर कीपर के पद से हटाकर पेट्रोल पंप अटेंडेंट बना दिया। साथ ही उनके वेतन से 2,57,190 रुपये की वसूली का आदेश भी दिया गया। कर्मचारी ने इस फैसले के खिलाफ विभाग में अपील की, लेकिन अपीलीय प्राधिकारी ने भी उनकी अपील खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभागीय रिकॉर्ड का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि दंड देने वाले आदेश में यह नहीं बताया गया कि कर्मचारी पर लगे आठ आरोपों पर क्या विचार किया गया। आदेश में यह भी दर्ज नहीं था कि जांच रिपोर्ट पर कर्मचारी ने जो आपत्तियां उठाई थीं, उन पर क्या फैसला लिया गया। अदालत ने कहा कि आदेश में सीधे सजा सुना दी गई, जबकि उसके पीछे के कारण नहीं बताए गए।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस आदेश का किसी कर्मचारी की नौकरी, करियर या अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है, उसमें स्पष्ट कारण लिखना कानूनी रूप से जरूरी है। कारणों के बिना प्रभावित व्यक्ति यह भी नहीं समझ सकता कि उसके खिलाफ फैसला किन आधारों पर लिया गया और वह उसे आगे किस आधार पर चुनौती दे।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने एचआरटीसी कर्मचारी को पदावनत करने और उससे 2,57,190 रुपये की वसूली करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा