हिमाचल हाईकोर्ट में तीन नए न्यायाधीश नियुक्त

 


शिमला, 27 अगस्त (हि.स.)। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार चिराग भानु सिंह को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल को दो वर्ष की अवधि के लिए हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

कानून एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 217 की धारा (1) और अनुच्छेद 224 के तहत की गई हैं। तीनों की नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन वे अपने-अपने पद का कार्यभार संभालेंगे।

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जून में इन तीनों न्यायिक अधिकारियों के नामों को पिछले दिनों हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए मंजूरी दी थी। इसके बाद नियुक्ति की प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्तर पर पूरी हुई। अब केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद तीनों के हाईकोर्ट न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने का रास्ता तय हो गया है।

चिराग भानु सिंह का वकालत से न्यायपालिका तक लंबा सफर

चिराग भानु सिंह वर्तमान में कांगड़ा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें न्यायिक और कानूनी क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मंडी के वल्लभ पीजी कॉलेज से स्नातक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से विधि की पढ़ाई की। वर्ष 1994 में वे हिमाचल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े और सिविल, आपराधिक, संवैधानिक तथा सेवा मामलों में वकालत की।

वर्ष 2003 में उन्हें हिमाचल प्रदेश सरकार का उप महाधिवक्ता नियुक्त किया गया। वे हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य भी रहे। वर्ष 2007 में उन्होंने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। इसके बाद सोलन, ऊना, चंबा और बिलासपुर सहित कई जिलों में न्यायिक जिम्मेदारियां संभालीं।

उन्होंने औद्योगिक न्यायाधिकरण एवं श्रम न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में भी काम किया। वहां करीब दो वर्ष के दौरान 1500 से अधिक मामलों का निपटारा किया। वर्ष 2009 में वे भारत के न्यायिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में ऑस्ट्रेलिया भी गए थे।

भूपेश शर्मा को न्यायिक प्रशासन का लंबा अनुभव

भूपेश शर्मा वर्तमान में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की और 9 जुलाई 1996 को धर्मशाला में उप न्यायाधीश-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया।

करीब 30 वर्षों के न्यायिक करियर में उन्होंने मंडी, शिमला, सरकाघाट, सुंदरनगर और सोलन सहित विभिन्न न्यायालयों में सेवाएं दीं। वर्ष 2012 में उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति मिली। उन्होंने सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।

भूपेश शर्मा ने रामपुर बुशहर, हमीरपुर, सोलन, ऊना और शिमला में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम किया। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त किया गया। न्यायिक प्रशासन और अदालतों के प्रबंधन का उन्हें लंबा अनुभव है।

योगेश जसवाल ने जिला अदालतों से न्यायिक अकादमी तक संभाली जिम्मेदारियां

योगेश जसवाल वर्तमान में सिरमौर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। उनका जन्म ऊना जिले की अंब तहसील के अंबोटा गांव में हुआ। उन्होंने वर्ष 1991 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री हासिल की और शिमला में दीवानी, आपराधिक तथा राजस्व मामलों में वकालत की।

वर्ष 1996 में न्यायिक सेवा में चयन के बाद उन्होंने हमीरपुर, रोहड़ू और पालमपुर में उप न्यायाधीश-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में काम किया। इसके बाद सिविल जज वरिष्ठ श्रेणी, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पदों पर सेवाएं दीं।

वर्ष 2013 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति मिली और वे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। इसके बाद घुमारवीं, रामपुर बुशहर, चंबा और कांगड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार भी रहे और श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में भी काम किया।

मई 2024 में उन्हें हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी शिमला का निदेशक नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वे सिरमौर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा