हिमाचल के स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलेगा, कौशल आधारित शिक्षा पर जोर

 

शिमला, 27 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल के स्कूलों में अब केवल पाठ पूरा करने पर जोर नहीं रहेगा। बच्चों को कक्षा में सोचने, सवाल करने, संवाद करने, मिलकर काम करने और समस्याओं का समाधान खोजने के अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार UNESCO के सहयोग से HP FUTURES कार्यक्रम के तहत कौशल आधारित शिक्षा को स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। समग्र शिक्षा इसके क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दे रहा है।

छह जिलों के 18 शिक्षकों ने सीखे नए तरीके

इसी कड़ी में शिमला में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर, बिलासपुर और हमीरपुर के 18 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। मेलबर्न विश्वविद्यालय की प्रो. एस्थर केयर और अमेरिका की सुश्री हेलेन ने प्रमुख संसाधन विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखा कि रोजमर्रा की कक्षा गतिविधियों के जरिए बच्चों में आलोचनात्मक सोच, संवाद, सहयोग, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसे कौशल विकसित किए जा सकते हैं।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने पाठ योजनाओं और कक्षा गतिविधियों में बदलाव भी किए। इसमें बच्चों को अपने विचार रखने, चर्चा करने, मिलकर काम करने, समस्याओं का समाधान तलाशने और सीखी गई बातों को व्यवहार में लाने के अवसर बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण के बाद संबंधित स्कूलों में इन तरीकों के इस्तेमाल का अवलोकन भी किया जा रहा है।

नवंबर में तीसरी कार्यशाला, दिसंबर से छह जिलों में विस्तार

शिक्षकों के अनुसार अब पाठ योजना बनाते समय वे यह तय कर रहे हैं कि बच्चों में कौन-से कौशल विकसित करने हैं और इसके लिए कक्षा में कौन-सी गतिविधियां उपयोगी होंगी। उनका कहना है कि नए तरीकों से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और बच्चों के लिए सीखना अधिक रुचिकर हो सकता है। प्रो. एस्थर केयर ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद शिक्षक बच्चों को कक्षा में अधिक सक्रिय भागीदारी के अवसर दे रहे हैं। बच्चों के सीखने के तरीके को देखते हुए शिक्षण प्रक्रिया में आगे के कदम तय करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अगस्त में इसी तरह की एक कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। तीसरी कार्यशाला नवंबर में होगी। दिसंबर से प्रदेश के बाकी छह जिलों के चयनित स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। पायलट स्तर के अनुभवों के आधार पर इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम होगा।

HP FUTURES के तहत कौशल आधारित शिक्षा के साथ ग्रीनिंग एजुकेशन और मूल्य शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीनिंग एजुकेशन के जरिए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े विषयों को स्कूलों से जोड़ा जा रहा है। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में मूल्य शिक्षा विकसित करने पर भी जोर है।

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा