आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल में बिजली हुई सस्ती, 1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
शिमला, 25 मार्च (हि.स.)। आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हिमाचल प्रदेश में लोगों को बिजली दरों में मामूली लेकिन अहम राहत मिली है। ऐसे समय में जब राज्य सरकार खर्चों पर सख्ती बरत रही है और कई कठिन फैसले ले चुकी है, बिजली नियामक आयोग ने सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में एक पैसे प्रति यूनिट की कटौती करने का फैसला किया है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।
हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। केंद्र सरकार से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद हो चुकी है। इसी वजह से राज्य सरकार को वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए कई सख्त कदम उठाने पड़े हैं। सुक्खू सरकार ने अगले वित्त वर्ष के बजट में मंत्रियों से लेकर अधिकारियों तक के वेतन का 50 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत तक हिस्सा अगले छह महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही सरकार ने बजट में कोई बड़ी लोकलुभावनी घोषणा भी नहीं की है।
इससे पहले सरकार बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सलाहकारों को मिलने वाला कैबिनेट रैंक भी खत्म कर चुकी है, जिससे अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई जा सके। मुख्यमंत्री पहले ही बजट पेश करने के बाद यह संकेत दे चुके हैं कि अगले छह महीनों में सरकार को और कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं और लोगों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे माहौल में बिजली दरों में कमी को उपभोक्ताओं के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश बिजली नियामक आयोग की ओर से जारी टैरिफ आदेश के अनुसार वित्त वर्ष 2026–27 के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड की वार्षिक राजस्व आवश्यकता 8636.16 करोड़ रुपये तय की गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025–26 के 8403.25 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद औसत बिजली आपूर्ति लागत में एक पैसे प्रति यूनिट की कमी दर्ज की गई है।
आयोग ने वर्ष 2026–27 के लिए औसत बिजली आपूर्ति लागत 6.75 रुपये प्रति यूनिट तय की है, जबकि पिछले वर्ष यह 6.76 रुपये प्रति यूनिट थी। इसी आधार पर सभी उपभोक्ता वर्गों के लिए ऊर्जा शुल्क में एक पैसे प्रति यूनिट की कटौती की गई है।
नई दरों के अनुसार 60 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले लाइफलाइन उपभोक्ताओं के लिए बिजली दर 4.71 रुपये प्रति यूनिट रहेगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 से 125 यूनिट तक 5.44 रुपये प्रति यूनिट और 125 यूनिट से अधिक खपत पर 5.89 रुपये प्रति यूनिट दर तय की गई है।
गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के 0 से 20 केवीए स्लैब के लिए 6.37 रुपये प्रति यूनिट और कृषि उपभोक्ताओं के लिए 5.03 रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित की गई है। वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए 0 से 20 केवीए स्लैब में 6.39 रुपये प्रति यूनिट, 20 से 100 केवीए में 6.30 रुपये और 100 केवीए से ऊपर 6.20 रुपये प्रति यूनिट दर तय की गई है।
छोटे उद्योगों के लिए 0 से 20 केवीए स्लैब में 5.71 रुपये प्रति यूनिट और 21 से 50 केवीए तथा 50 से 100 केवीए तक के मध्यम उद्योगों के लिए 5.60 रुपये प्रति यूनिट दर लागू होगी। बड़े उद्योगों के लिए 220 केवी और उससे अधिक पर 5.45 रुपये प्रति यूनिट, 132 केवी पर 5.50 रुपये और 66 केवी पर 5.55 रुपये प्रति यूनिट दर तय की गई है।
रेलवे के लिए बिजली दर 6.29 रुपये प्रति यूनिट और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के लिए 6.78 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। सिंचाई और पेयजल योजनाओं के लिए लो टेंशन पर 6.41 रुपये, हाई टेंशन पर 6.01 रुपये और अतिरिक्त हाई टेंशन पर 5.61 रुपये प्रति यूनिट दर लागू होगी। बल्क सप्लाई के लिए लो टेंशन पर 6.17 रुपये, हाई टेंशन पर 5.67 रुपये और अतिरिक्त हाई टेंशन पर 5.47 रुपये प्रति यूनिट दर तय की गई है, जबकि स्ट्रीट लाइटिंग के लिए 6.36 रुपये प्रति यूनिट दर निर्धारित की गई है।
हालांकि इस टैरिफ आदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। आयोग के सूत्रों के अनुसार सब्सिडी देना या न देना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और यदि सरकार सब्सिडी देती है तो उसकी भरपाई सरकार को बिजली बोर्ड को करनी होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा