हिमाचल में शुरू होगा 'खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान', 11.56 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार
शिमला, 22 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार नशे, खासकर 'चिट्टा' के खिलाफ अब खेलों को बड़ा माध्यम बनाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार शाम शिमला में 'खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान' की बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस राज्यव्यापी अभियान की रूपरेखा और रणनीति की समीक्षा की। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़कर नशे से दूर रखना और पूरे प्रदेश में चिट्टा के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों की बढ़ती समस्या चिंता का विषय है। नशे की लत केवल युवाओं का भविष्य खराब नहीं करती, बल्कि परिवारों और पूरे समाज पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करने के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता और नशा छोड़ने के प्रयासों पर भी एक साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं। इसी सोच के साथ 'खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त अभियान' शुरू किया जा रहा है, जिससे युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके और वे नशे से दूर रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सभी 3,758 ग्राम पंचायतों, आठ नगर निगमों, 29 नगर परिषदों और 39 नगर पंचायतों में चिट्टा के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही उन 235 ग्राम पंचायतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिन्हें चिट्टा की समस्या से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इन इलाकों में विशेष अभियान चलाकर लोगों और युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत खेल प्रतियोगिताएं उपमंडल, जिला और राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं के संचालन, निगरानी और व्यवस्था के लिए तकनीकी समितियां बनाई जाएंगी। इनमें खेल संघों के रेफरी के साथ युवा सेवाएं एवं खेल, शिक्षा और पुलिस विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए 11.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। विजेता और उपविजेता टीमों को पुरस्कार राशि भी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वस्थ, अनुशासित और सक्षम युवा पीढ़ी तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, नशे की शुरुआत होने से पहले ही जागरूकता फैलाना, समय रहते हस्तक्षेप करना और समाज की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'नशा मुक्त हिमाचल' का लक्ष्य सरकार, शिक्षण संस्थानों, खेल संगठनों, स्थानीय निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और नागरिक समाज के साझा प्रयासों से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से इस अभियान को जमीनी स्तर पर सफल बनाने में सक्रिय सहयोग देने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा