हिमाचल में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा, एनडीडीबी के साथ हुए तीन समझौते
शिमला, 16 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच तीन अहम समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये समझौते सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की उपस्थिति में हुए। राज्य सरकार की ओर से पशुपालन विभाग के सचिव रितेश चौहान और हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ समिति (मिल्क फेड) के प्रबंध निदेशक अभिषेक वर्मा ने हस्ताक्षर किए, जबकि बोर्ड की ओर से इसके अध्यक्ष मिनश शाह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौतों के तहत पहला समझौता कांगड़ा मिल्क यूनियन के गठन और संचालन से जुड़ा है। दूसरा समझौता सिरमौर जिले के नाहन और सोलन जिले के नालागढ़ में 20-20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने से संबंधित है। इसके साथ ही हमीरपुर जिले के जलाड़ी और ऊना जिले के झलेड़ा में 20-20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध शीतलन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। तीसरा समझौता मिल्क फेड में उद्यम संसाधन योजना सॉफ्टवेयर लागू करने से जुड़ा है, जिससे डेयरी क्षेत्र के कामकाज को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा सके।
कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का आधुनिक स्वचालित दूध प्रसंस्करण संयंत्र बनाया जा रहा है। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर तीन लाख लीटर प्रतिदिन तक की जा सकेगी। नई कांगड़ा मिल्क यूनियन में कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों को शामिल किया जाएगा, जिससे दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
डेयरी क्षेत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए मिल्क फेड में उद्यम संसाधन योजना सॉफ्टवेयर लागू किया जाएगा। इसके जरिए दूध संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, उत्पादन, भंडारण और वितरण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव होगा। इससे दूध उत्पादक किसानों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रहेगा और उन्हें समय पर भुगतान मिल सकेगा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और डेयरी क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से सीधे किसान के हाथ में पैसा देने पर काम कर रही है। जब किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा, तो गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने दूध खरीद पर समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी की है। गाय के दूध का मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इसके अलावा दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत दूध संग्रह केंद्र तक स्वयं दूध पहुंचाने पर तीन रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जा रहा है और परिवहन सब्सिडी में भी 1.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
कृषि मंत्री चन्द्र कुमार ने कहा कि ‘हिम’ ब्रांड के उत्पादों को देश के बड़े ब्रांडों की तरह आगे बढ़ाने की योजना है, ताकि प्रदेश के डेयरी उत्पादों को बड़ा बाजार मिल सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष अक्तूबर तक ढगवार दूध प्रसंस्करण संयंत्र शुरू हो जाएगा, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों के किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा