हिमाचल के 400 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल प्रधानाचार्यों के बिना, प्रवक्ता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
शिमला, 26 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में करीब 400 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के पद खाली होने और प्रवक्ताओं को शिक्षण कार्य के साथ अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने पर स्कूल प्रवक्ता संघ ने नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि इससे प्रवक्ताओं पर काम का बोझ बढ़ रहा है और विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज संघ ने चेतावनी दी है कि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो अगले महीने से प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी, महासचिव इंदर सिंह ठाकुर, चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर और कार्यकारी अध्यक्ष दीप सिंह खन्ना सहित राज्य कार्यकारिणी तथा सभी जिलों के अध्यक्षों और महासचिवों ने जारी बयान में सरकार से प्रवक्ताओं की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की मांग की है। संघ का कहना है कि सरकार के समक्ष कई बार मांगें उठाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। अब इन मांगों को आश्वासनों तक सीमित रखने के बजाय उन पर ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।
संघ के अनुसार प्रदेश के करीब 400 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रधानाचार्यों के बिना चल रहे हैं। इन स्कूलों में प्रधानाचार्य से संबंधित प्रशासनिक और प्रबंधकीय कार्यों का अतिरिक्त भार प्रवक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। उन्हें एक ओर विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, वहीं दूसरी ओर नियमित कक्षाएं लेकर विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम पूरा करवाना होता है। संघ ने प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों को भरने और पात्र प्रवक्ताओं की पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल पूरी करने की मांग की है। उसका कहना है कि पदोन्नति में देरी से विद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ रहा है।
संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी ने कहा कि पिछले दो महीनों से प्रवक्ता जनगणना ड्यूटी सहित अन्य कार्यों में व्यस्त रहे हैं। अब विद्यालयों में लौटने के बाद उन्हें प्राथमिक पाठशालाओं में भी प्रतिनियुक्त किया जा रहा है। इससे वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं में नियमित पढ़ाई और निर्धारित पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि प्रवक्ताओं को अपनी निर्धारित कक्षाएं पढ़ाने के साथ उन कक्षाओं की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है, जिनके लिए उनकी नियुक्ति नहीं हुई है।
संघ ने सरकार से प्रवक्ताओं को उनके मूल शिक्षण कार्य से हटाकर अन्य जिम्मेदारियां सौंपने की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उसका कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की जिम्मेदारियां तय करते समय वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं की पढ़ाई और पाठ्यक्रम पूरा करने की जरूरत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संघ ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और स्कूल शिक्षा निदेशक को सौंपे गए 15 सूत्रीय मांगपत्र पर भी गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से लंबित मांगों पर निर्णय नहीं होने से प्रदेश के प्रवक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते समस्याओं के समाधान के लिए कदम नहीं उठाए तो अगले महीने से प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू की जाएगी।
पात्र प्रवक्ताओं के वित्तीय लाभ के मामले भी लंबित
संघ ने पात्र प्रवक्ताओं के एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) से जुड़े मामलों में देरी पर भी नाराजगी जताई है। संघ के अनुसार, कई पात्र कर्मचारियों के मामले करीब एक वर्ष से लंबित हैं। विभागीय कार्रवाई की धीमी गति के कारण कर्मचारियों को अपने वित्तीय लाभ के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
संघ ने कहा कि निर्धारित नियमों और शर्तों को पूरा करने वाले कर्मचारियों को समय पर वित्तीय लाभ देना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पात्रता होने के बावजूद मामलों को लंबे समय तक लंबित रखना कर्मचारियों में असंतोष बढ़ाता है। संघ ने इन मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा