चूड़धार में चूडेश्वर महाराज की तपोस्थली में स्नान का बड़ा महत्व, हर मनोकामना होती है पूरी

 


नाहन, 03 सितंबर (हि.स.)। जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार, चूड़ेश्वर महादेव की तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित इस धार्मिक स्थल से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। मान्यता है कि चूड़धार में स्नान करने से श्रद्धालु पवित्र होते हैं और सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रत्येक प्रांत से श्रद्धा भाव से आए श्रद्धालुओं की मनोकामना चूड़ेश्वर महादेव पूर्ण करते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार चूड़ेश्वर शिरगुल महाराज के साथ चूड़धार में दो शिलाओं के नीचे गोगा जाहरवीर गुरु महाराज रात्रि विश्राम करते हैं। बताया जाता है कि प्राचीन समय में जब शिरगुल महाराज दिल्ली की ओर हाट के लिए गए थे, तो वहां राजाओं के सैनिकों ने उन्हें बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया था। मान्यता है कि उन्हें कारागार से छुड़ाने में गोगा जाहरवीर महाराज और माता भंगयाणी का विशेष योगदान रहा।

इसी दौरान शिरगुल महाराज ने गोगा जाहरवीर महाराज को अपना धर्म-भाई बनाया और चूड़धार में उनके लिए स्वतंत्र स्थान निर्धारित किया। आज भी सिरमौर और शिमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों से गोगा जाहरवीर के श्रद्धालु चूड़धार पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां रात्रि विश्राम, स्नान और पूजा-अर्चना के बाद अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं।

चूड़धार के पुजारी पंडित दीप राम ने बताया कि श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा के साथ चूड़ेश्वर धाम पहुंचते हैं। देव आराध्य शिव स्वरूप शिरगुल महाराज और गोगा महाराज के आशीर्वाद से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। यहां स्नान को भी विशेष शुभ माना जाता है।

वहीं गोगा जाहरवीर महाराज के पुजारी सुरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि चूड़धार में गोगा जाहरवीर महाराज के मंदिर और सराय के निर्माण की मांग रखी गई है, ताकि जागरण व पयाशली की जा सके। मान्यता के अनुसार गोगा जाहरवीर महाराज वर्तमान में शिला के नीचे अपने स्वतंत्र स्थान पर विराजमान हैं और समय आने पर निर्माण को लेकर भक्तों को उनका आदेश प्राप्त होगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर