पीजी दाखिले में पुराने डॉक्टरों की सेवा अवधि को मिले महत्व : मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन
शिमला, 30 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के पीजी दाखिलों को लेकर पुराने और नए डॉक्टरों के हितों का मुद्दा उठने लगा है। हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (एचएमओए) ने प्रदेश सरकार की 28 अक्टूबर को जारी पीजी और सुपर स्पेशियलिटी नीति में संशोधन पर पुनर्विचार करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि नए भर्ती हुए चिकित्सकों को पीजी करने का अवसर मिलना चाहिए, लेकिन वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे पुराने जनरल ड्यूटी ऑफिसर्स (जीडीओ) की सेवा अवधि और उनके योगदान को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के अनुसार कई पुराने जीडीओ ने नियुक्ति के बाद शुरुआती तीन वर्ष यानी करीब 1,095 दिन ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा दी है। इस दौरान उन्होंने सीमित संसाधनों में मरीजों का उपचार करने के साथ आपातकालीन सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों से जुड़े कार्यक्रमों में काम किया। कोविड महामारी के दौरान भी इन चिकित्सकों ने अग्रिम पंक्ति में सेवाएं दीं।
एसोसिएशन की मुख्य आपत्ति पीजी प्रवेश के लिए मिलने वाले ग्रामीण सेवा प्रोत्साहन अंकों को लेकर है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि पुराने जीडीओ की शुरुआती तीन वर्ष की पात्र ग्रामीण सेवा को प्रोत्साहन अंकों की गणना से बाहर रखा जाता है तो उन्हें अपनी सेवा का उचित लाभ नहीं मिलेगा। एसोसिएशन ने शहरी स्वास्थ्य संस्थानों में तीन वर्ष या इससे अधिक समय तक सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के मामलों की भी नियमों के अनुसार समीक्षा करने की मांग की है।
एसोसिएशन के अनुसार 28 अक्टूबर की अधिसूचना में खंड 4(बी) में संशोधन कर नए भर्ती हुए प्रशिक्षु चिकित्साधिकारियों को निर्धारित शर्तों के अधीन पीजी (एमडी/एमएस) और पीजी (एमडीएस) के 66.6 प्रतिशत सेवाकालीन कोटे में विचार किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसमें पीजी पूरी करने के बाद शेष प्रशिक्षण सेवा और बांड संबंधी शर्तें भी शामिल हैं।
एसोसिएशन ने सरकार से पुराने जीडीओ की पात्र सेवा अवधि, ग्रामीण प्रोत्साहन अंकों और मेरिट पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन ने संबंधित प्रावधानों और अनुलग्नकों में जरूरी संशोधन या स्पष्टीकरण जारी करने की मांग भी की है। उसका कहना है कि पीजी काउंसलिंग से पहले इस विषय पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
एसोसिएशन ने कहा कि यह नए और पुराने डॉक्टरों के बीच विवाद का विषय नहीं है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें नए चिकित्सकों को उच्च शिक्षा के अवसर मिलें और पहले से सेवाएं दे रहे डॉक्टरों के हित भी सुरक्षित रहें।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा