हरोली में खाद केंद्र खोलेगा हिमफेड, नगरोटा बगवां में लगेगा शहद प्रसंस्करण संयंत्र

 

शिमला, 09 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ मर्यादित (हिमफेड) ने घाटे से उबरकर वित्तीय स्थिति सुधारने और कारोबार बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। संस्था ने अगले वर्ष तक घाटे से पूरी तरह बाहर निकलकर मुनाफे में आने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ऊना जिले के हरोली में नया खाद बिक्री केंद्र खोलने, कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां में शहद प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने और नए पेट्रोल पंप खोलने की संभावनाएं तलाशने का निर्णय लिया गया है।

हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को शिमला में आयोजित निदेशक मंडल की बैठक में ये निर्णय लिए गए। बैठक में प्रबंध निदेशक और निदेशक मंडल के सभी सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान पिछली बैठक के 104 एजेंडा मदों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की गई। इसके अलावा 34 नए एजेंडा मदों पर चर्चा कर व्यावसायिक विस्तार और जनहित से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

खाद कारोबार में पिछले साल से पांच करोड़ रुपये अधिक टर्नओवर

महेश्वर चौहान ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से करीब चार महीने तक देशभर में खाद की आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके बावजूद हिमफेड ने कर्मचारियों के प्रयासों से सितंबर के अंत तक उर्वरक कारोबार में पिछले वर्ष की तुलना में करीब पांच करोड़ रुपये अधिक का टर्नओवर हासिल किया है। पिछले वर्ष सितंबर में खाद की बिक्री करीब तीन करोड़ रुपये थी, जो इस वर्ष बढ़कर 6.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए ऊना जिले के हरोली में तत्काल प्रभाव से नया खाद बिक्री केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां में शहद प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इससे शहद के प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से संस्था की आय बढ़ाने की योजना है। नए पेट्रोल पंप खोलने के लिए भी व्यावहारिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

सेब खरीद से तीन से सवा तीन करोड़ रुपये का लाभ

हिमफेड अध्यक्ष ने बताया कि जब उन्होंने संस्था का कार्यभार संभाला था, उस समय हिमफेड भारी घाटे में था। प्रबंधन के प्रयासों से अब वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले वर्ष तक संस्था घाटे से पूरी तरह बाहर निकलकर मुनाफे में आ जाएगी।

चौहान के अनुसार हिमफेड को सेब खरीद से करीब तीन से 3.25 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। संस्था अपनी आय बढ़ाने और खर्चों पर नियंत्रण रखने के लिए भी कदम उठा रही है। वित्तीय रिसाव रोकने के उद्देश्य से हिमफेड की प्रमुख संपत्तियों के किरायों में 50 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में स्थित दुकानों की मरम्मत कराकर उनसे आय बढ़ाने की व्यवस्था की गई है।

दिवाली पर पेश होंगे नए उत्पाद

हिमफेड ने अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने के लिए तलवाड़ा की उन्नति संस्था के साथ समझौता भी किया है। इस समझौते के तहत दिवाली पर नए उत्पाद पेश किए जाएंगे। इससे संस्था की आमदनी बढ़ाने और निचले हिमाचल में अपने कारोबार का आधार मजबूत करने की योजना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा