शिमला मेयर कार्यकाल मामला: राज्यपाल की मंजूरी के बाद सुनवाई 19 मार्च तक टली
शिमला, 05 मार्च (हि.स.)। हिमाचल हाईकोर्ट में नगर निगम शिमला के महापौर के कार्यकाल से जुड़े विवाद पर सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। गुरूवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे राजपत्र में प्रकाशित किया जाना बाकी है। सरकार की ओर से कहा गया कि ऐसे में इस याचिका पर फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि जब यह जनहित याचिका दायर की गई थी, उस समय ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं था, जिसके तहत मेयर अपने तय अढ़ाई साल के कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर बने रह सकते। उनका कहना था कि अब जो कानून पारित हुआ है, वह भविष्य के लिए लागू हो सकता है, लेकिन मौजूदा मेयर के मामले में इसे लागू नहीं किया जा सकता। इसी मुद्दे पर अदालत में यह सवाल उठा कि क्या इसी याचिका में कोई आदेश दिया जा सकता है या फिर याचिका में संशोधन की जरूरत होगी। इस पर विस्तृत सुनवाई के लिए मामला 19 मार्च तक टाल दिया गया।
दरअसल, प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को समाप्त होने जा रहे मौजूदा मेयर के कार्यकाल को अध्यादेश के जरिए बढ़ाकर पांच साल कर दिया था। इस अध्यादेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके बाद सरकार ने 4 दिसंबर 2025 को इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित कर राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था। जनवरी 2026 में राज्यपाल ने कुछ आपत्तियां जताते हुए विधेयक को वापस सरकार को भेज दिया था।
इसके बाद सरकार ने 16 फरवरी को इस विधेयक को दोबारा विधानसभा में पेश किया और उसी दिन इसे फिर से पारित कर दिया। दोबारा राज्यपाल के पास भेजे जाने के बाद अब इसे मंजूरी मिल गई है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की है। इसी मामले में पार्षद आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने खुद को याचिकाकर्ता के रूप में शामिल करने के लिए आवेदन किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है।
अधिवक्ता अंजलि सोनी वर्मा ने इस मामले में राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और महापौर सुरेंद्र चौहान को प्रतिवादी बनाया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के इरादे से मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के लिए अध्यादेश लाया। अब अदालत 19 मार्च को इस पूरे मामले पर आगे की सुनवाई करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा