कॉलेज प्राध्यापक संघ एचजीसीटीए ने किया सरकार की समेकन नीति का पूर्ण समर्थन
मंडी, 18 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ एचजीसीटीए राज्य सरकार की उस हालिया पहल का स्वागत करता है, जिसके अंतर्गत कम नामांकन वाले महाविद्यालयों के विलय तथा शिक्षकों के युक्तिकरण रैशनलाइजेशन के माध्यम से महाविद्यालयों का समेकन किया जा रहा है। एचजीसीटीए की राज्य अध्यक्ष बनिता सकलानी ने कहा कि
संघ इस कदम को राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानता है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करके कि स्थापित महाविद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक और संसाधन उपलब्ध हों, यह निर्णय शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की गुणवत्ता को सीधे बेहतर करेगा तथा सार्वजनिक व्यय का समुचित उपयोग सुनिश्चित करेगा।
एचजीसीटीए समेकन नीति का पूर्ण समर्थन करता है। चाहे न्यूनतम नामांकन सीमा 75 रखी जाए या 100 विद्यार्थियों की, संघ सरकार के अंतिम निर्णय का पूरा समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संघ का आग्रह है कि समेकन वास्तविक छात्र उपस्थिति के आधार पर किया जाए—विशेष रूप से आगामी विश्वविद्यालय परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों की संख्या को आधार बनाया जाए, ताकि नामांकन आंकड़ों में किसी भी प्रकार की हेरफेर को रोका जा सके।
बनिता सकलानी ने कहा कि संघ विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी के लिए विशेषीकृत महाविद्यालयों की स्थापना का भी जोरदार समर्थन करता है। यह केंद्रित दृष्टिकोण विषय-विशेष उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा और एक अधिक प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक वातावरण तैयार करेगा। शिक्षक समुदाय राज्य सरकार को इन सुधारों के क्रियान्वयन में अपना पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन देता है, ताकि राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता का एक नया मानदंड स्थापित किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा